अमीर को दी गई वन भूमि पर ग्रामीणों का आंदोलन

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जमशेदपुर, 7 जून : गरीब के बदले पूंजीपति को वन भूमि का पट्टा देने और पूंजीपति द्वारा मिली हुई वन भूमि की  प्रकृति को बदलने के खिलाफ आज पचासों ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में तुरियाबेड़ा गांव के टोला बुरूसाई के ग्रामीण शामिल थे। उन्होंने देवघर गांव के निवासी विजय सिंह मुंडा की जमीन पर जेसीबी द्वारा हो रहे निर्माण कार्य को रुकवाया। मालूम हो विजय सिंह मुंडा को रघुवर दास सरकार के समय वनाधिकार कानून 2006 के तहत वन भूमि का आवंटन किया गया था। मौके पर उपस्थित ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि देवघर मौजा और तुरिया बेड़ा मौजा के अंतर्गत आती है। देवघर पंचायत के ग्राम प्रधान की ज़िम्मेदारी थी कि वन भूमि पट्टा देते वक्त तुरियाबेड़ा और बुरूसाई के ग्राम प्रधानों को इसकी सूचना दें। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। ग्रामीणों का कहना है कि वनाधिकार कानून के तहत मिलने वाले ज़मीन की प्रकृति नहीं बदली जा सकती है। लेकिन ज़मीन को जेसीबी द्वारा प्लेन किया जा रहा था। इस जमीन में पावर प्लांट का घातक और हानिकारक फ्लाई ऐश भी गिराया जा रहा था। फ्लाई ऐश से आसपास के पेड़ पौधे मर जाते। ग्रामीणों ने बताया कि नियम के अनुसार वन अधिकार कानून के तहत वैसे व्यक्ति को वन भूमि मिलनी चाहिए, जो व्यक्ति  वन भूमि पर आश्रित हो। लेकिन यहाँ जिसे ज़मीन अंवटित की गई है वह बड़ा व्यापारी है। उसकी बहुमंजिली इमारत भी है। तुरियाबेड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि वे उस जमीन पर वर्षों से अपने गाय बैलों को चराने हैं और उसी जमीन पर तुरियाबेड़ा ग्राम सभा का फुटबॉल मैदान भी है। इस तरह यह आवंटन पूरी तरह से वनाधिकार कानून का उल्लंघन है। ग्रामीणोंं द्वारा उक्त वन भूूमि आवंटन की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई। 

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