इजरायली सॉफ्टवेयर से किसकी जसूसी?

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भारत में जासूसी कराने के कई किस्से हैं। जिनकी जासूसी हुई और जिनने कराई दोनों जानने समझने लायक हैं। इसके लिए इजराइल का मशहूर और महंगा सॉफ्टवेयर खरीदना भी शामिल है। भारत में इससे लोगों की जासूसी हुई। सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी ने जो कहा उसका सार संक्षेप यह कि वह सिर्फ सरकारों को सॉफ्ट (मैल) वेयर बेचती है पर हमारी सरकार ने न खरीदने की पुष्टि की न नहीं खरीदने की। ऐसे में भारत के लोगों की जासूसी किसने की, किसलिए की, यही पता नहीं चला। हमारी लोकप्रिय और भारी बहुमत वाली सरकार ऐसी कई मनमानियों के लिए जानी जाती है। कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने अब ट्वीट कर पूछा है कि जासूसी करने वाले ये भारतीय कौन हैं? रायटर की नौ जून की इस खबर के अनुसार दुनिया भर के राजनीतिकों और निवेशकों की जासूसी हुई है। ये काबिल लोग भारत के हैं। ईमानदारी का ढिंढ़ोरा पीटने वाली हमारी सरकार को क्या नहीं चाहिए कि इनका पता लगाए और कम से कम यह जाने के इनने किससे कितने कमाए ताकि आयकर मिले या पीएम केयर्स में दान ही या फिर दोनों? क्या पता भारत सरकार ने जांच करवा भी ली हो या करवा रही हो। बहुमत में सवाल पूछने का हक नहीं मिलता है। वैसे भी बहुमत देने वाले ताली बजाकर खुश हैं, तो साणू की।

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