कोविड-19 योद्धाओं को रणभूमि से वापस बुलाया

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कविकुमार

जमशेदपुर, 13 जून : झारखंड राज्य में सबसे अधिक कोरोना संक्रमण वाले पूर्वी सिंहभूम जिले में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने शर्मनाक आदेश जारी किया है। इस आदेश में जिला दंडाधिकारी एवं उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम के अधीन कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव हेतु विभिन्न कार्यों में लगे हुए जूनियर इंजीनियरों एवं एसडीओ को कोरोना युद्ध छोड़कर वापस आने का लिखित आदेश दिया गया है। जबकि ये अधिकारी पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त रवि शंकर शुक्ला के अधीन कोरोना पीड़ितों और संदिग्धों की मदद में लगे हैं। परियोजना में जूनियर इंजीनियरों की संख्या 20 तथा एसडीओ की संख्या 2 है।मालूम हो स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना लघु वितरण प्रमंडल संख्या 3 की कार्यपालक अभियंता माया रानी लाल ने 11 जून को एक लिखित आदेश देते हुए सभी जूनियर इंजीनियरों से कहा है कि वे 15 जून 2020 को चांडिल बाईं मुख्य नहर एवं शाखा लघु नहर में पानी छोड़ने की तैयारी में लग जाएं। पत्र में कहा गया है कि उक्त आदेश चांडिल कंपलेक्स जमशेदपुर के मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम के पत्र के आधार पर दिया जा रहा है। माया रानी लाल ने अपने आदेश में लिखा है कि इस कार्य के महत्व को देखते हुए वे यह सूचना दें कि वे कोविड-19 प्रतिनियुक्ति से विरमित हुए हैं या नहीं? इसके बाद कार्यपालक अभियंता माया रानी लाल ने जिला प्रशासन को चुनौती देते हुए लिखा है कि यदि जूनियर इंजीनियर विरमित नहीं भी हुए हैं तो भी 15 जून 2020 को पानी प्रवाह का मॉनिटरिंग प्रतिवेदन उन्हें देना सुनिश्चित करें तथा इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दें।इस पत्र का मतलब साफ है कि जूनियर इंजीनियर एवं एचडीओ कोरोना से युद्ध को सर्वोच्च प्राथमिकता न देकर नहर में पानी बहाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। जबकि मानसून लगभग आ ही चुका है और किसानों को पानी की जरूरत नहीं है।एक तरह से इस आदेश को एंटी नेशनल आदेश माना जा सकता है। कोरोना को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया है। इस आपदा के समय जनहित में कार्य कर रहे अधिकारियों को वापस बुलाना आपराधिक कार्य है। इसके तहत स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के चीफ इंजीनियर विरेंद्र राम तथा कार्यपालक अभियंता माया रानी लाल पर आपदा अधिनियम के धाराओं के तहत कार्यवाही की जा सकती है। 

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