कौन बचा रहा है अस्पताल के दोषी अफसरों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या मंत्री बन्ना गुप्ता

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कविकुमार
जमशेदपुर, 18 जून: कोल्हान के एकमात्र बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल काॅलेज अस्पताल में महिला रोगियों के साथ बलात्कार और छेड़खानी की घटनाओं को छुपाने वाले अस्पताल अधीक्षक और अस्पताल उपाधीक्षक को कौन बचा रहा है? यह सवाल जमशेदपुर के आम लोगों के लिए अबतक पहेली बना हुआ है।
कानून के मुताबिक बलात्कार और छेड़खानी की घटना छुपाने के आरोप में अस्पताल अधीक्षक और उपाधीक्षक पर आईपीसी की धारा 201 (साक्ष्य छुपाने की कोशिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए थी। यह गैर जमानती धारा है। परंतु मार्च 2020 से अब तक अस्पताल में ऐसे दो कांड हो जाने के बाद भी अधीक्षक और उपाधीक्षक पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। याद रहे 5-6 मार्च 2020 की रात अस्पताल के मेडिकल वार्ड में दाखिल महिला के साथ बलात्कार की घटना को अधीक्षक और उपाधीक्षक द्वारा छुपाने के सबूत भी जमशेदपुर पुलिस को मिले थे। उस वक्त के सीनियर एसपी अनूप बिरथरे से पत्रकारों ने पूछा था कि बलात्कार की घटना को छुपाने वाले अस्पताल प्रबंधन के अधिकारियों पर एफआइआर क्यों नहीं किया गया? तब अनूप बिरथरे ने कहा था कि यह मामला प्रशासन देखेगा। परंतु प्रशासन के बड़े अधिकारी उपायुक्त ने बलात्कार की सूचना छुपाने की कोशिश करने वाले अस्पताल अधीक्षक और उपाधीक्षक पर कोई कार्यवाही नहीं की।
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डाॅक्टर नितिन मदन कुलकर्णी और पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त रवि शंकर शुक्ला कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी माने जाते हैं। संभवतः उन पर ऊपर से पड़े राजनीतिक दबाव के चलते वे इस मामले में कार्रवाई नहीं कर पाए। मालूम हो महिला के साथ बलात्कार के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उसे फौरन डिस्चार्ज कर अस्पताल से भगा दिया था। इतना ही नहीं उस वार्ड की अन्य महिलाओं को भी डिस्चार्ज कर दिया गया था। जिससे प्रेस को ये महिलाएं बलात्कार की बात न बता पाएं। जबकि सभी महिलाएं बीमार थीं। बलात्कार पीड़ित महिला के रोने और अस्पताल से बाहर निकाले जाने का सीसीटीवी फुटेज अस्पताल अधीक्षक और उपाधीक्षक द्वारा देखने के बाद भी उनके द्वारा पुलिस को सूचना नहीं दी गई। उल्टे उन्होंने प्रेस में बयान दिया कि अस्पताल में बलात्कार की कोई घटना नहीं घटी है, यह सब अफवाह है। सिर्फ ‘आज़ाद मज़दूर’ अखबार ने महिला रोगी के साथ बलात्कार की घटना को प्रकाशित किया। इस समाचार पर स्वतः संज्ञान लेकर तबके सीनियर एसपी अनूप बिरथरे ने जांच कराई और बलात्कार पीड़ित महिला को खोज निकाला। साकची के थानेदार कुणाल कुमार ने बलात्कार का मुकदमा दर्ज कर बलात्कारी को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत कोर्ट को समर्पित किए गए। इस पूरे मामले को छुपाने की कोशिश करने वाले अस्पताल अधीक्षक डाॅ. संजय कुमार और उपाधीक्षक डाॅ. नकुल चैधरी को तुरंत पदमुक्त नहीं किया गया, जैसा कि पूर्व अधीक्षक डाॅ. आरवाई चैधरी के साथ किया गया था। मालूम हो 1 फरवरी 2016 को रात 9 बजे एक नाबालिक लड़की के साथ अस्पताल के बाथरूम में 53 साल के प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड शंभू महतो ने बलात्कार का प्रयास किया था। यह लड़की 26 जनवरी 2016 को अस्पताल में दाखिल हुई थी। इसके साथ परसुडीह के एक युवक ने बलात्कार किया था। मसलन एक बलात्कार पीड़िता रोगी के साथ फिर से अस्पताल के सुरक्षाकर्मी ने बलात्कार का प्रयास किया। इस घटना के प्रकाश में आने पर पुलिस ने सुरक्षाकर्मी को गिरफ्तार कर लिया। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य विभाग के तबके प्रधान सचिव के. विद्यासागर ने अस्पताल अधीक्षक डाॅ. आरवाई चैधरी को तत्काल अधीक्षक पद की कुर्सी से हटा दिया। ध्यान देना वाली बात यह है कि डाॅ. आरवाई चैधरी को अस्पताल में बलात्कार की कोशिश होने के बाद अपना पद छोड़ना पड़ा। उस वक्त भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार थी तथा भ्रष्ट कहे जाने वाले रामचंद्र चंद्रवंशी झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री थे। जबकि 6 मार्च 2020 को महिला रोगी के साथ बलात्कार हो जाने के बाद भी अस्पताल अधीक्षक और उपाधीक्षक को किसी ने छूने की कोशिश भी नहीं की। इस चमत्कार के पीछे किसका हाथ है? खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का या स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का, यह जांच का विषय है।
चैंकाने वाली बात यह है कि 8 जून 2020 को फिर से एमजीएमसीएच अस्पताल के ओटी असिस्टेंट कुंदन शर्मा द्वारा ईसीजी कराने आई एक युवती के गुप्तांग से छेड़छाड़ की गई। युवती ने अपने पिता को इसकी जानकारी दी तो उसके पिता ने इसकी शिकायत अस्पताल अधीक्षक और उपाधीक्षक से की। इस बार भी अस्पताल प्रबंधन और डाॅक्टर की तरफ से इस मामले को दबाने का प्रयास किया गया। मामले की जांच में गए एक पत्रकार से डाॅक्टर पूनम ने उस लड़की को मानसिक बीमार बताते हुए न्यूज़ छपने से हतोत्साहित किया। डाॅक्टर पूनम ने पत्रकार से कहा कि मानसिक बीमारी के चलते युवती की सेक्स एक्टिविटी ज्यादा हो गई होगी। लेडी डाॅक्टर ने रिपोर्टर से कहा कि वे भी तो उन पर दुष्कर्म का आरोप लगा सकती हैं। इससे लेडी डाॅक्टर की नीयत का पता चलता है। इस तरह डाॅक्टर पूनम ने पीड़ित युवती को ही दोषी करार देने की कोशिश की। अस्पताल अधीक्षक और उपाधीक्षक ने इस घटना की खबर पुलिस को नहीं दी। उन्होंने युवती के पिता से कहा कि वे लिखित में शिकायत करेंगे तब ही कार्यवाही की जाएगी। अधीक्षक और उपाधीक्षक ने सच्चाई जानने के लिए सीसीटीवी कैमरा देखने की जरूरत भी नहीं समझी। चूँकि युवती के पिता हिंदुस्तान अखबार के हाँकर थे इसलिए वे डरे नहीं और खुद उन्होंने दुष्कर्मी को अस्पताल से पकड़ कर पुलिस के हवाले किया।
घटना के 2 घंटे तक दुष्कर्मी कुंदन शर्मा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के आॅपरेशन थिएटर के बाथरूम में छुप कर बैठा रहा। अस्पताल अधीक्षक और उपाधीक्षक ने सीसीटीवी कैमरे की मदद से उसे पकड़ने की कोशिश नहीं की। युवती के पिता ने उसे खोज कर पकड़ा और उसकी पिटाई करने लगे। इसी बीच अस्पताल में तैनात होमगार्ड के जवान आ गए और साकची थाना को खबर देकर दुष्कर्मी को गिरफ्तार कराया। अगर युवती के पिता बहादुरी न दिखाते तो अस्पताल अधीक्षक, उपाधीक्षक और डाॅक्टर पूनम ने मिलकर इस मामले को भी दवा दिया था। दुष्कर्म पीड़िता युवती सोनारी की निवासी बताई जाती है। वह काॅलेज की छात्रा है।

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