चीन के हमले का बहादुरी से जवाब दिया जाए, चाहे नतीजा जो भी हो

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मेरे कुछ मार्क्सवादी मित्र मेरे एक पोस्ट से बेहद नाराज लगते हैं। मैं भारत के मार्क्सवादियों से सिर्फ यह पूछता हूँ कि मार्क्स और लेनिन के अनुसार भारत को चीन के खिलाफ आज कौन सी रणनीति अपनानी चाहिए? एक बात मैं स्पष्ट कर दूं कि देशभक्ति फासिस्टों का नारा है। मैं देशभक्त बिल्कुल नहीं हूँ, पर कायर भी नहीं हूँ। मैं चाहता हूँ कि अगर चीन ने हम पर हमला किया है तो उसका बहादुरी से प्रतिकार होना चाहिए। चाहे नतीजा जो भी आये। हाँ मैं यह चिंता जरूर करता हूँ कि अगर 1962 की तरह चीन से युद्ध हुआ तो हमारी 5 से 10 करोड़ की आबादी अगले पाँच सालों में भूख और बीमारी से मर जायेगी। उन्हें बचाने की हमारी अर्थव्यवस्था में कूबत नहीं है! – अखिलेश सिंह

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