जब अखबार झूठ बोलें ‘सूत्र’ फर्जी सूचना दें

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सरकार अब तक लोगों को यह यकीन दिलाने में लगी थी, सब चंगा सी। अब सरकार कह रही है, भारत की सारी गतिविधियां नियंत्रण रेखा के इस तरफ हैं। अनुवाद – हमारे घर में घुस के मारा (यह अखबार का अनुवाद है और ऐसे ही लिखा है)। हमारा सिद्धांत है, हम घर में घुस के मारेंगे – नरेन्द्र मोदी, 5 मार्च 2019 को 26 फरवरी को बालाकोट में हवाई हमले पर टिप्पणी करते हुए। अखबार ने लिखा है कि गड़बड़ी 5 मई 2020 को ही शुरू हो गई थी। 13 मई को भारतीय सेना के प्रमुख एमएम नरवाने ने एएनआई से कहा था, गए हफ्ते या 10 दिन में जो कुछ हुआ है उसमें कुछ भी नया नहीं है …. (द टेलीग्राफ की आज की लीड के खास अंश) चीन से संबंधित कुछ और खास बातें
1. 2014 में नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से मोदी और शी 18 बार मिले। 2. भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने 5 बार चीन का दौरा किया। यह 73 साल में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का सबसे ज्यादा चीन दौरा है।  3. मई 2019 में मोदी के दोबारा जीतने के बाद दोनों नेता तीन बार मिल चुके हैं। 4. शी के पद संभालने के बाद मोदी सात बार चीन गए हैं। 5. कल का संघर्ष 1962 के युद्ध के बाद पिछले पांच दशक में सबसे बड़ा था। 6. जब हमारे तीन सैनिक मरे थे, तो उनके पांच थे। जब हम 20 सैनिकों की मौत स्वीकार करनी पड़ी तो हमारी सूचनाओं ने उनके मृतकों की संख्या बढ़ाकर 43 करी दी। इन्हीं सूत्रों से हमें यह पता नहीं चला था कि कि चीन ने हमारे क्षेत्र में कब्जा कर लिया है जिसे हम वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। 7. हमारी सेना ने 20 मौतें स्वीकार कीं। पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) ने नहीं किया। वास्तव में, उन्होंने मरने वालों की संख्या पर बात करने से इनकार किया। 8. हमारी सारी बातें हमारी जमीन पर हैं जिसे चीन ने कब्जा कर अपना बना लिया है। कल का संघर्ष भी हमारी अपनी जमीन पर था जो 1962 से हमारे पास थी, जिस पर अब चीन ने कब्जा कर लिया है। 9. हमारे सैनिकों के शव चीनियों द्वारा हमें सौंपे जा रहे हैं न कि हम उनके सैनिकों के शव उन्हें सौंप रहे हैं। इससे साबित हो जाता है कि उस क्षेत्र का नियंत्रण किसके पास है। कई सैनिक लापता हैं। कई घायल हैं। कुछ को अभी भी बंदी बनाया गया है। 10. इन सभी मौतों में, एक व्यक्ति लगातार चुप है।

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