तो प्रवासी मज़दूरों को ऐसा कष्ट नहीं सहना पड़ता !

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कुछ लोग इतिहास में नहीं जाना चाहते।क्योंकि उनके लिए इतिहास असुविधाजनक होता है। किंतु सवाल है कि यदि आप इतिहास की गलतियों को नहीं जानिएगा तो उससे शिक्षा ग्रहण कैसे करिएगा?जबकि, आज भी इतिहास की गलतियां दुहराई जा रही हैं। जवाहरलाल नेहरू को अपने लिए धनोपार्जन करने में कोई रूचि नहीं थी। पर, उन्होंने अपनी सरकार के भष्टाचार को नजरअंदाज किया। नरेंद्र मोदी को भी निजी संपत्ति खड़ी करने में कोई रूचि नहीं है। मोदी ने सिर्फ एक ही अंतर लाया। अपने मंत्रिमंडल को भ्रष्टाचार से काट दिया। पर मोदी सरकार को सरकार के आम भ्रष्टाचार के खिलाफ जितना कड़ा रुखअपनाना चाहिए, वह नहीं हो रहा है।यह चिंताजनक स्थिति है।महाजनों येन गतः स पन्था – नेहरू काल के भ्रष्टाचार का एक नमूना देखिए। सन 1963 में ही तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष डी. संजीवैया को इन्दौर के अपने भाषण में यह कहना पड़ा  कि ‘वे कांग्रेसी जो 1947 में भिखारी थे, वे आज करोड़पति बन बैठे।गुस्से में बोलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा था कि ‘झोपड़ियों का स्थान शाही महलों ने और कैदखानों का स्थान कारखानों ने ले लिया है।’ अब इसके मूल में जाइए। सन 1948 के जीप घोटाले के आरोपी केंद्र में मंत्री बना दिए गए। 1950 के पहले की अन्य शर्मनाक बात है। एक अन्य केंद्रीय मंत्री के पुत्र पर दिल्ली के बगल के एक राज्य में हत्या का आरोप लगा। केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण हस्ती ने उस मंत्री पुत्र को केस से बचाते हुए विदेश भिजवा दिया। अब बताइए, ऐसी घटनाओं से कैसा संदेश जाएगा? देश में अपराध व भ्रष्टाचार बढ़ेगा या घटेगा?यदि बढ़ेगा तो देश कैसे बनेगा? फिर कारखाने दारों से लेकर मज़दूरों तक की वही हालत रहेगी जो आज भी है।

भ्रष्टों और अपराधियों के खिलाफ निर्मम होकर चीन ने 1949 के बाद अपने देश को बना दिया। वहां भ्रष्टाचार के लिए फांसी का प्रावधान है। आप कहेंगे कि वहां तो तानाशाही रही है। तो फिर सिंगापुर का उदाहरण ले लीजिए। जो लोग कहते हैं कि राजनीति और प्रशासन से भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो सकता, वे सिंगापुर के संस्थापक शासक ली कुआन यू /1923-2015/की कहानी पढ़ लें। यह कि उन्होंने किस तरह सिंगापुर को बदल दिया। कुछ लोग यह भी कह देंगे कि सिंगापुर जैसे छोटे देश को बदलना आसान है, भारत जैसे बड़े देश को नहीं। अरे यार, मुम्बई महा नगरपालिका तो छोटा भूभाग है। हमारे नेता और अफसर उसे भी तो ठीक नहीं कर पाते। जबकि, मुम्बई महा नगरपालिका का सालाना बजट गोवा के बजट से काफी अधिक है। दिल्ली महा नगरपालिका भी नहीं सुधर पा रही है।

जिन्हें सिंगापुर जैसी भी हल्की तानाशाही मंजूर नहीं है, वे लगता है कि 1975-77 की भारत की तानाशाही सुविधापूर्ण ढंग से भूल गए। लोक सभा की अपनी सीट बचाने के लिए देश पर तानाशाही थोपी जा सकती है, पर अपने ही वायदे  ‘गरीबी हटाने’ के लिए नहीं।
दो शब्द नरेंद्र मोदी के बारे में भी:
मोदी जी, 2014 का लाल किले का आपका भाषण देश को याद है। आपने कहा था कि यदि आज किसी अफसर के पास किसी काम से जाइए तो वह पूछेगा कि ‘इसमें मेरा क्या?’ जब कहा जाएगा कि आपका कुछ नहीं तो कह देगा कि ‘ फिर मुझे क्या?’ यानी रिश्वत के बिना कोई काम नहीं हो रहा। इस स्थिति में आपने पिछले छह साल में कितना फर्क लाया है? मुझे तो लगता है – बहुत कम। हां, आपके किसी मंत्री के भ्रष्टाचार सामने नहीं आए। संभवतः आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है।आपको जितनी ताकत जनता ने दी है, उसके बल पर आप उच्च प्रशासन में भी फर्क ला सकते थे। यदि नहीं लाइएगा तो इतिहास फिर आपको मौका नहीं देगा।आप फर्क लाइएगा तो राज्यों में भी फर्क आएगा। फर्क लाने के लिए सर्वाधिक जरुरी आई.ए.एस.की कार्यशैली में युगांतरकारी बदलाव। देश के सामने आगे के विकट संघर्षों के लिए सरकारी धन को लूट में जाने से जल्द से जल्द रोकिए। बाहर-भीतर के दुश्मनों से लड़ने के लिए अपार साधन की जरुरत पड़ने वाली है। भ्रष्टाचार पर जितना अधिक चोट कीजिएगा, आपकी लोकप्रियता उतनी ही बढ़ेगी। बेचारी कांग्रेस ने यही काम किया होता तो वह सत्ता से बाहर नहीं होती। उसके हाथों से चीजें निकल चुकी हैं।

2 thoughts on “तो प्रवासी मज़दूरों को ऐसा कष्ट नहीं सहना पड़ता !

  • June 9, 2020 at 1:53 pm
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    Prawasi mazdoor hi kyon, desh ka pura mazdoor warg aaj bhi garibi, ashikcha, swasthya samasya ka maar jhel raha hai. unhen itna ration dene ke baad bhi bhar pet bhojan nahin, 5 lakh ka bima ke baad bhi ilaj ke liye bhagam bhag, abhi bhi lakhon sauchalayon ke baad bhi pareshani, gramin bason me dhakka mukki, rail yatayat me bhi dhakka mukki, kahan jay aam mazdoor, ab to Delhi me bhi Sthayee Delhi walon ke alawa anya ko ilaj ki suvidha nahin, sarkari aspaton me bhi ilaj aur infrastructure ki kami. India Gandhi ki garibi Hatao ke baad se abtak kitni garibi hati hai yah to bhagwaan hi janta hai. lekin BPL card holders ko ration , gas, jan dhan yojna ke madhyam se unhe cash milna yah batata hai ki desh me ab bhi garibi apna jar root jamaye baitha hai, Aam admi ki takdir kab badlegi ki wah arram se trainon me safar kar sake, bason me seat mile aur truckon me safar ki bandish ho school me quality education mile. Garibo ka yah sapna kab pura hoga. desh ko bachane ke saath saath hame appne logo ko bhi bachana hai jaisa ki Manniya Pradhan Mantri Sri Narendra Modi ji ne Corona se nibatne ke liye kaha tha ki Jaan Bhi Jahaan Bhi. with regards to the writer and publisher. KK kalindi

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