पीएम केयर्स को अगर 3100 करोड़ ही खर्चना था

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दिल्ली से संजय कुमार सिंह
पीएम केयर्स ने अभी तक 3100 करोड़ रुपए ही खर्च किए हैं और 3800 करोड़ प्रधानमंत्री राहत कोष में दिसंबर 2019 से पड़े थे। अगर 3100 करोड़ ही खर्च करना था तो पीएम केयर्स की जरूरत क्या थी और उम्मीद से ज्यादा पैसे आ गए तो भी गरीबों को भूखे मारने और पैदल चलवाने का क्या मतलब लगाया जाए। वेंटीलेटर तो जब आएंगे तब आएंगे। जो मर गए वो लौटकर नहीं आएंगे। फिर भी सरकार ने कोरोना या भाजपा या पीएम केयर्स ने आम जनता को कोरोना से बचाने के लिए क्या किया है यह आम जनता को पता नहीं है। आखिर इतने पैसे रखकर काम नहीं करने का भी तो कोई कारण होना चाहिए। अगर इन पैसों से लोगों को कायदे से क्वारंटीन किया गया होता, जांच की गई होती, गरीबों को खाना खिलाया गया होता तो देश आज बल्ले बल्ले या फिर संभव है, भाजपा-भाजपा कर रहा होता। 
अब देखिए क्रोनोलॉजी 
(1) 28 मार्च 20 को रहस्यों में छिपे पीएम केयर्स फंड का गठन हुआ था। (2) 13 मई को पहली और एकमात्र घोषणा हुई कि इस कोष से 3100 रुपए आवंटित किए गए हैं। बाकी के 1000 करोड़ रुपए प्रवासी मजदूरों के कल्याण के लिए बताए गए हैं।  (3) 20 मई की इंडियास्पेंड की खबर के अनुसार इसमें 9677.9 करोड़ रुपए दान आ चुके थे। (4) 16 जून को भाजपा महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने एक वेंटीलेटर की तस्वीर पोस्ट की और दावा किया कि कुल मिलाकर इनकी संख्या इतनी होगी जितनी 65 साल में देश में खरीदे गए हैं। वैसे, 65 साल में किसी प्रधानमंत्री ने पीएम केयर्स नाम का कटोरा भी नहीं टांगा था। पर वह अलग मुद्दा है। (5) 23 जून को पीआईबी की एक विज्ञप्ति से बताया गया कि 1340 (जी हां 50,000 में से) वेंटीलेटर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अस्पतालों में पहुंच चुके हैं। बाकी के जब आएंगे तो खबर होगी। फिलहाल मुद्दा यह है कि तीन महीने में  पीएम केयर्स ने 10,000 करोड़ जुटाए और 3100 करोड़ खर्चे। उसमें काम कितना या कितने का हुआ है वह सबको पता है। विज्ञप्ति से समझ आ रहा है। 
सरकार और प्रधानमंत्री चाहते तो प्रधानमंत्री राहत कोष के 3800 रुपए से 3100 करोड़ रुपए का यह महान कार्य कर सकते थे (किया ही जाना चाहिए था)। बाकी समय में सरकार देश के भले के लिए कुछ ढंग का काम कर सकती थी या फिर आराम ही कर सकती थी। पीएम केयर्स नहीं बनाते तो जनता का कुछ बिगड़ने वाला नहीं था और ना उससे जनता का कोई भला हुआ है। 
पीएम केयर्स बना ही लिया था तो बाकी के 10,000 करोड़ से पैदल गांव गए और स्वर्ग सिधार गए प्रवासियों की जिन्दगी सुधारी जा सकती थी। साफ है कि पीएम केयर्स कोरोना के बहाने पैसे इकट्ठा करने के लिए है। काम तो अभी भी तय नहीं है। देश जवाब चाहता है। 

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