मामला रेलवे की जमीन से अवैध कब्जा हटाने का, विधायक, रेल अधिकारी और पुलिस को खरीदते करोड़पति

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कविकुमार

रेलवे की जमीन पर खड़ा बलवीर सिंह का टीके कंपलेक्स

जमशेदपुर, 26 जून : टिनप्लेट चौक पर रेलवे की जमीन में कब्जा करने की शुरुआत एक ऐसे पूंजीपति ने की, जो अपने विरोधियों के काम, क्रोध, लोभ, मोह का फायदा उठाकर उन्हें अपना समर्थक बनाने में माहिर हैं। इसी चाल के कारण वे रेलवे की जमीन पर 40 सालों से विशाल ऑफिस कंपलेक्स बनाकर आराम की जिंदगी जी रहे हैं। उस व्यक्ति का नाम सरदार बलवीर सिंह है। सरदार बलवीर सिंह आज के दिनों में अरबपति हैं। बिष्टुपुर स्थित चेंबर ऑफ कॉमर्स भवन के सामने इनका विशाल मॉल बनकर तैयार है। इस मॉल में नक्शा का उल्लंघन करने के लिए उनसे जेएनएसी के एक विशेष पदाधिकारी संजय कुमार पांडेय ने 5 लाख रुपए का फाइन वसूला था। जमशेदपुर के सभी बैंकों के मैनेजर बलवीर सिंह के इशारे पर नाचते हैं। इसी कारण टीनप्लेट चौक पर रेलवे की अवैध जमीन पर बैंकों ने अपनी शाखाएं और एटीएम खोल रखे हैं। जबकि नियम के मुताबिक अवैध जमीन पर बैंक की शाखाएं और एटीएम नहीं खोले जाते हैं। मालूम हो शुरू में बलबीर सिंह का धंधा बैंकों में भाड़े के जेनरेटर मुहैया कराने का था। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी साम, दाम, दंड, भेद की नीति से सभी बैंक मैनजरों को अपना लंगोटिया यार बना लिया। इसके लिए उन्होंने बैंक मैनेजरों के काम, लोभ और मोह का फायदा उठाया। धीरे-धीरे बलवीर सिंह का यह वार विधायक, सांसद और राजनीतिक दल के नेताओं पर भी होने लगा। अब सरदार बलबीर सिंह रावण के समान शक्तिशाली हैं। इनकी सेना में सुंदर-सुंदर युवतियां काम करते हैं, जो छोटे सरकारी अधिकारियों को बलवीर सिंह के पास तक पहुंचने ही नहीं देतीं। सरकारी अधिकारियों द्वारा बलवीर सिंह से मिलने की जिद करने पर ये युवतियां उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देती हैं। ऐसी धमकी वे जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी के छोटे अधिकारियों को दे चुकी हैं। यह जानकारी मिलने के बाद ही तबके विशेष पदाधिकारी संजय कुमार पांडेय ने खुद बलवीर सिंह की लंका, बिष्टुपुर स्थित मॉल, पर छापामारी की और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। छोटे सरकारी पदाधिकारियों हिम्मत बलवीर सिंह से मिलने तक कि नहीं है। 

रेलवे की पटरियों के ऊपर खड़ा कंपलेक्स का पिछला हिस्सा 

बताते हैं कि चार दशक पहले बलवीर सिंह ने टीनप्लेट चौक के पास रेलवे की जमीन का कुछ हिस्सा रेलवे से एलॉट कराया था। फिर बड़े पुलिस अधिकारियों से मिलीभगत का एलॉट हिस्से के बाहर अवैध जमीन पर टीओपी का निर्माण करा दिया। कुछ साल बाद टीओपी की जमीन पर भी उन्होंने कब्जा कर लिया और टीओपी को अपनी बिल्डिंग के ऊपर तल्ले में ले गए। अपने बिल्डिंग के पिछले किनारे पर भी बलवीर सिंह ने अवैध रूप से रेलवे की जमीन कब्जा की। और रेलवे की पटरी तक पहुंच गए। पुराने लोग बताते हैं कि टीनप्लेट चौक स्थित रेलवे की जमीन पर 40 सालों से कब्जा जमाए रखने के लिए सरदार बलबीर सिंह ने रेलवे के बड़े अधिकारियों के काम, लोभ, मोह का पूरा फायदा उठाया। जिससे उनका अवैध अतिक्रमण आज भी सही सलामत है। उनकी देखा देखी अन्य जमीन माफिया ने भी यहां रेलवे की जमीन पर कब्जा किया और पुलिस एवं सरकारी अधिकारियों को भी यहां बसाया। इस संदर्भ में गोलमुरी के थाना प्रभारी निहालुद्दीन का नाम सबसे ऊपर है। उन्होंने रेलवे की जमीन में घर बनाया, जब वे गोलमुरी के थाना प्रभारी थे। इसी दौरान रेलवे ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया तो सरदार बलवीर सिंह और थाना प्रभारी नेहालुद्दीन के उकसाने पर लोगों ने  रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और रेलवे के बड़े अधिकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। थाना प्रभारी नेहालुद्दीन के कारण जिला पुलिस मूक दर्शक बनी रही। इन दिनों रेलवे के अधिकारी फिर से रेलवे की जमीन पर बलवीर सिंह और अन्य जमीन माफिया का अवैध कब्जा हटाने की कोशिश कर रहे हैं तो गरीबों के नाम पर बलवीर सिंह ने एक षड्यंत्र के तहत भारतीय जन मोर्चा के नेताओं को अपने बचाव में ला खड़ा किया है। चौंकाने वाली बात यह है की विधायक सरयू राय भी सरदार बलवीर सिंह के झांसे में आये दिखाई देते हैं। रेलवे की जमीन पर बसे हुए गरीब लोगों को प्रधानमंत्री आवास दिलाया जा सकता है। परंतु बड़े-बड़े मॉल बनाने वाले जमीन माफिया को रेलवे से बचाना किसी भी तरह उचित नहीं है, ऐसा शहर के लोगों का मानना है।

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