वन विभाग की जमीन पर मज़दूरों के बदले पोकलेन से खोद दिया गया तालाब

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जमशेदपुर, 18 जून: जमशेदपुर प्रखंड की कई पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत बनाए जाने वाले तालाब मज़दूरों द्वारा नहीं बल्कि पोकलेन मशीन द्वारा खोदे गए। बाद में तालाब की मिट्टी से पोकलेन के दांत के निशान मिटाने के लिए कुछ मज़दूरों को काम पर लगाया गया। मनरेगा के तहत श्रमिकों के बदले मशीनों से काम कराना अपराध की श्रेणी में आता है। जबकि प्रवासी मज़दूर अपने-अपने घरों में लौट आए हैं और मज़दूरों की कमी बिल्कुल नहीं है। इस तालाब की लागत 4 लाख रुपए बताई जाती है।
इस धांधली का भंडाफोड़ तब हुआ जब पलाशबनी पंचायत के छोटाबांकी गांव में एक सरकारी तालाब वन विभाग की जमीन पर खोद दिया गया। वन विभाग के पदाधिकारी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने अपनी जमीन नापी के लिए फाॅरेस्टर पी. देवगम को भेजा। फाॅरेस्टर ने देखा कि 10,000 वर्ग फिट का तालाब वन भूमि में खोदा गया है। जिसका काम आधा हो चुका है। फाॅरेस्टर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तालाब खोदने के लिए पोकलेन रखा गया था, मौके पर कोई भी मज़दूर नहीं था।
एक तरफ तो मज़दूरों के बदले में पोकलेन से तालाब खोदकर सरकारी नियमों को ताक पर रखा गया, दूसरी तरफ वन विभाग की जमीन में तालाब खोदकर सरकार के करीब ढाई लाख रुपए बर्बाद कर दिए गए। वन विभाग की जमीन पर तालाब खोदने के मामले में मुखिया, वार्ड मेंबर, रोजगार सेवक से लेकर प्रखंड के जूनियर इंजीनियर और अंचल कार्यालय के पदाधिकारियों का दोष बताया जाता है। इन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से नहीं निभाई, जिसके चलते सरकारी या रैयती जमीन के बदले में वन विभाग की जमीन में तालाब खोद दिया गया।

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