कोरोना वार !! मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने लोगों को भगवान भरोसे छोड़ा

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जमशेदपुर, 2 जून : झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निराशा भरे शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य और जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। वे कल देर रात रांची में प्रेस को अनलॉक वन के बारे में जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने सर की बला राज्य के सर थोप कर सारी जिम्मेदारी राज्यों को दे दी है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के संबंध में इसका नतीजा झारखंड राज्य पर क्या पड़ेगा वह कुछ दिन बाद ही देखा जा सकता है। हेमंत सोरेन ने अनलॉक वन कि केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन कि ज्यादातर बिंदुओं पर मुहर लगा दी परंतु 8 जून से मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च आदि पूजा स्थल खोलने से उन्होंने साफ इनकार कर दिया।

हेमंत सोरेन के निराशा पूर्ण बयान से जाहिर होता है कि वे अभी लॉक डाउन समाप्त कर अनलॉक करने के पक्ष में नहीं थे। परंतु केंद्र सरकार द्वारा अनलॉक करने पर वे आपत्ति भी नहीं कर सके क्योंकि झारखंड के तकरीबन सभी व्यापारी और उद्योगपति अनलॉक चाहते थे। उद्योगपति और पूंजीपतियों के विरोध में जाना संभवतः सरकार के वश बस में नहीं था। जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अभी कुछ दिनों तक लॉक डाउन रखना चाहते थे क्योंकि झारखंड में उन्होंने प्रवासी मज़दूरों को बुलाना जारी रखा है। अभी बाहर के राज्यों से करीब दो लाख प्रवासी मज़दूर झारखंड आ चुके हैं और उनके आने से झारखंड में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अभी करीब तीन लाख से ज्यादा प्रवासी मज़दूरों का आना बाकी है। जिसके कारण हेमंत सोरेन चिंतित बताए जाते हैं। हाल ही में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा था कि झारखंड में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।याद रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार के रेल मंत्री पीयूष गोयल पर सबसे ज्यादा दबाव बनाकर देश की पहली स्पेशल ट्रेन झारखंड में बुलाई। झारखंड सरकार ने जमकर ढिंढोरा पीटा की वह प्रवासी मजदूरों की हितैषी है क्योंकि उसने देशभर के सभी राज्यों से पहले प्रवासी मज़दूरों के लिए स्पेशल ट्रेन चलवाई। इससे लाखों प्रवासी मजदूर हेमंत सोरेन के पक्के समर्थक हो गए मसलन वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के पक्के वोटर बन गए। परंतु मजदूरों के आने से झारखंड में कोरोना तेजी से फैलने लगा तथा यहां के सवा तीन करोड़ निवासी अंदर ही अंदर हेमंत सोरेन से असहमत हो गए। 

गौर किया जाए तो प्रवासी मजदूरों को झारखंड भेज कर कोरोना संक्रमण के प्रसार की दोषी केंद्र सरकार है। न केंद्रीय रेल मंत्री स्पेशल ट्रेन देते हैं न कोरोना वायरस यात्रा का झारखंड के गांव-गांव तक पहुंचता। केंद्र सरकार शुरू में ही मजदूरों को, जो जहां है वहां रहे, का पाठ पढ़ाती और उनके बैंक अकाउंट में 50-50 हजार रुपए जमा कर देती तो मज़दूर 5 महीने तक हिलते भी नहीं। परंतु प्रधानमंत्री ने, जो जहां है वहां रहे, का नारा तो दिया परंतु इस नीति का पालन कराने में केंद्र सरकार पूरी तरह फेल हो गई।

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