प्यार ने छुड़ाया हिंसा का रास्ता नक्सली एरिया कमांडर और उसकी प्रेमिका नक्सली में किया आत्मसमर्पण

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जमशेदपुर, 4 जून : कुख्यात नक्सली राजा प्रमाणित गिरोह के कुचाई एरिया कमांडर राकेश मुंडा उर्फ सुखराम मुंडा तथा दस्ता की सदस्या नक्सली चांदनी उर्फ बुधनी सरदार ने आज सरायकेला-खरसावां पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वे अपने साथ कोई हथियार नहीं लाएं। राकेश मुंडा कुचाई थाना क्षेत्र के कुदाडीह गांव का निवासी तथा चांदनी खरसावां थाना क्षेत्र की रायजमा गांव की निवासी बताई जाती है। इस मौके पर सरायकेला-खरसावां के एसपी मोहम्मद अर्शी, उपायुक्त, समादेष्टा सीआरपीएफ 196 बटालियन, अपर पुलिस अधीक्षक अभियान, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी वगैरह भी मौजूद थे।

एसपी मोहम्मद अर्शी ने जानकारी दी कि राकेश मुंडा कुचाई थाना के 4 तथा खरसावां थाना के 1 गंभीर मामले में अभियुक्त है। चांदनी खरसावां थाना के एक मामले में अभियुक्त है। राकेश मुंडा पर हत्या का पहला मुकदमा 17 दिसंबर 2014 को दर्ज किया गया था। उसपर अंतिम मुकदमा 29 नवंबर 2009 को दर्ज किया गया। उस पर हत्या के अलावा यूएपी एक्ट, सीएल एक्ट, एक्सप्लोसिव एक्ट, हाफ मर्डर वगैरह कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे किए गए। चांदनी पर 9 अप्रैल 2002 को यूएपी एक्ट, 17 सीएल एक्ट, 27 आर्म्स एक्ट वगैरह धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।आत्मसमर्पण करने वाले एरिया कमांडर राकेश मुंडा ने आत्मसमर्पण के बाद पुलिस को जानकारी दी कि वह 22 वर्ष का है। आर्थिक तंगी के कारण वह मजदूरी करने गुजरात गया था। वहां से वह अपने गांव वापस आया उस समय महाराजा प्रमाणिक का नक्सली दस्ता उसके गांव के आसपास के जंगलों में घूम रहा था। मई 2016 को महाराजा प्रमाणिक दस्ता के 10-12 सदस्य उसके गांव में आए। राकेश मुंडा ने महाराजा प्रमाणिक से मुलाकात की। महाराजा ने उसे दस्ते में शामिल होने पर प्रतिमाह अच्छा वेतन देने को कहा। तब वह दस्ता में शामिल हो गया। उसने पुलिस को बताया कि उसे जोंबरो में हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद उसे 3 नॉट 3 का राइफल सौंपा गया। वहीं उसकी मुलाकात कुख्यात नक्सली प्रशांत बोस उर्फ किशन दा एवं अनल दा उर्फ पति राम मांझी से हुई। उसने बताया कि जनवरी 2019 को पुलिस के साथ चारसुइड पहाड़ में नक्सलियों की मुठभेड़ हुई। इसके बाद उसको कुचाई क्षेत्र का एरिया कमांडर बनाया गया तथा उसे एसएलआर हथियार दिया गया। 2019 के मई महीने में हुण्डंगदा शुरू डैम एवं रायसिंगदी पहाड़ पर पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में इन लोगों के एक साथी प्रदीप स्वांई पुलिस की गोली से मारा गया। जोम्बरो पहाड़ में शहीद सप्ताह मनाने के बाद इनका दस्ता विधानसभा चुनाव में नवंबर 2019 में बाधा पहुंचाने के लिए रायसिंदरी पहाड़ पहुंचा। इसी बीच पुलिस के साथ मुठभेड़ हो गई। इसके बाद दस्ता और अराहंगा पहाड़ के तरफ गया। वहां से लौटकर जोम्बरो चला गया। 

आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली चांदनी ने बताया कि बचपन में उसकी माता का देहांत हो गया था। तब वह अपने चाचा के यहां जराइकेला में पढ़ाई करने चली आई। बड़ी होने पर वर्ष 2017 में उसके चाचा उसको रायजमा गांव पहुंचा गए। इस गांव के आसपास नक्सली दस्ता आता रहता था। इसी दौरान वर्ष 2018 के अप्रैल माह में उसके गांव में महाराजा प्रमाणिक का दस्ता आया। महाराजा उसके घर आया और उसने उसके पिताजी को भड़काते हुए कहा कि शुरू डैम बनने से उनका गांव डूब जाएगा। वे लोग शुरू डैम बनने का विरोध करेंगे। इसलिए शुरू डैम का विरोध करने  उनके संगठन में आ जाओ। अपने गांव को डूबने से बचाने के लिए वह नक्सली बन गई। महाराजा प्रमाणिक दस्ते के साथ जोम्बरो पहाड़ में चली गई। वह दस्ता के लोगों के लिए खाना बनाने का काम करती थी और समय मिलने पर हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया करती थी। बाद में उसको कार्बाइन हथियार दिया गया। वह कुख्यात नक्सली रमेश दा से मिली। 2018 जून को कोर्रा कसरौली के पास पुलिस के साथ उसके दस्ते की मुठभेड़ हुई। उसने बताया कि रायजामा पुलिस पिकेट बनाने से नक्सली दस्ते में काफी आक्रोश था। पार्टी कमांडरों द्वारा पिकेट को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा था। इस क्रम में अप्रैल 2020 में कांडागोड़ा चौक के पास पुलिस बल को लक्षित कर आईईडी विस्फोट कर पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई। 

महाराजा प्रमाणिक दस्ते में ये दोनों साथ चलते थे तथा एक दूसरे से बातचीत करते थे। यह बात महाराजा प्रमाणिक को पसंद नहीं थी। वह उन्हें आपस में बातचीत करने से रोकता और डांटा था। इस बीच फरवरी 2020 को राकेश मुंडा के घर की कुर्की जब्ती हुई। चांदनी की तबीयत खराब रहने लगी। इन दोनों ने महाराजा प्रमाणिक से मदद के लिए रुपए मांगे। प्रमाणिक ने रुपए देने से इनकार कर दिया। मुसीबत के समय रुपये नहीं मिलने के कारण इन दोनों नक्सलियों का दस्ते से मोह भंग हो गया। चांदनी को भी इस बात का पता चल गया की महाराजा प्रमाणिक ने शुरु डैम से गांव के डूबने का झूठ बोलकर उसे पार्टी में शामिल किया। इन दोनों ने सोचा कि कंधे पर हथियार लादकर जंगल-जंगल भटकने, भूखे प्यासे रहने से अच्छा है कि वे दोनों दस्ते से भाग कर शादी कर लें और अपने परिवार के साथ जीवन बसर करें। वे अप्रैल 2020 को दस्ता छोड़कर बिना हथियार भाग गए। घर आने के बाद झारखंड सरकार द्वारा पुनर्वास नीति नई दिशा के बारे में उन्हें जानकारी मिली। सरकार की इस स्कीम से प्रभावित होकर पुलिस के समक्ष अपने मन से इन्होंने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया। जिला के एसपी ने बताया कि अभी भी कई नक्सली बचे हुए हैं। जिनके लिए आत्मसमर्पण करने का यह अच्छा मौका है। नई दिशा नीति का लाभ उठाकर वे आत्मसमर्पण कर सकते हैं। ऐसा नहीं करने पर वे परिणाम भुगतने को तैयार रहें। पुलिस के पास इनामी और वांछित नक्सलियों की सूची मौजूद है। जो व्यक्ति नक्सलियों की सूचना पुलिस को देगा तथा उन्हें गिरफ्तार करने में मदद करेगा उसका नाम गुप्त रखते हुए घोषित इनाम की राशि उसे प्रदान की जाएगी। एसपी ने नक्सलियों को चेतावनी दी कि वे हिंसावादी और विध्वंसकारी विचारधारा त्याग कर आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई भुगतने के लिए तैयार रहें। बताते हैं कि इस आत्मसमर्पण से माओवादी एवं उग्रवाद कमजोर हुआ है तथा झारखंड पुलिस का हौसला बढ़ा है।

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