कोरोना पॉजिटिव मरीज अस्पताल के बदले क्वारंटाइन सेंटर और घर में रहने को मजबूर

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जमशेदपुर, 27 जुलाई : जमशेदपुर में स्वास्थ्य विभाग से कोरोना के संक्रमित संभाले नहीं जा रहे हैं। नतीजतन कोरोना  पॉजिटिव मरीजों को भी कई दिनों तक अस्पताल के बदले में क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा जा रहा है। जिससे वे वैसे लोगों को भी संक्रमित कर रहे हैं, जो शक के आधार पर क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखे गए हैैं। इस तरह कई क्वॉरेंटाइन सेंटर कोरोना संक्रमण फैलाने का काम करना रहेे हैं।

जानकार डॉक्टरों का कहना है कि इसी कारण जमशेदपुर में तेजी से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है।लॉकडाउन में घर से बाहर नहीं निकलने वाली एक महिला क्वारंटाइन सेंटर में रहकर कोरोना पॉजिटिव हो गई। वह और उसकी बेटी को जमशेदपुर कोर्ट में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के सामने 164 सीआरपीसी का बयान देना था। न्यायाधीश ने उन्हें कोरोना टेस्ट कराकर कोर्ट में हाजिर होने को कहा। 18 जुलाई 2020 को कदमा थाना ने एमजीएमसीएच के अधीक्षक को पत्र देकर मां बेटी का कोरोना टेस्ट कराने को कहा। स्वाब का नमूना देने के बाद दोनों को सिदगोडा प्रोफेशनल फ्लैट क्वॉरेंटाइन सेंटर में रख दिया गया। महिला के पिता सुरेंद्र खरबंदा ने कहा कि यहां  कॉमन लेट्रिन-बाथरूम है। एक सीढ़ी का इस्तेमाल सभी लोग करते हैं तथा खाना लेने के लिए सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन करते हुए लाइन बनाई जाती है। जिससे कोरोना फैलने की पूरी संभावना है। और वैसा ही हुआ। पूरी घटना के बारे में सुरेंद्र खरबंदा ने बताया कि उनकी बेटी और नतिनी को 5 दिनों तक क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा गया तथा छठे दिन रात 8 बजे उनको कोरोना निगेटिव होने की बात कह कर छोड़ दिया गया। इसी तरह अन्य 10 मरीजों को भी कोरोना नेगेटिव होने की बात कह कर छोड़ दिया गया। वे अपनी बेटी और नतिनी को अपने शास्त्रीनगर कदमा स्थित घर लाए। दूसरे दिन सुबह 5 बजे उनके घर में मजिस्ट्रेट पहुंच गए और उन्होंने कहा कि आपकी बेटी कोरोना पॉजिटिव है और नतिनी कोरोना नेगेटिव।

इस पर सुरेंद्र खरबंदा ने मजिस्ट्रेट से पूछा कि वे लिखित में दें कि बिना रिपोर्ट के उनकी बेटी को निगेटिव बताते हुए कैसे छोड़ दिया गया। काफी तर्क वितर्क के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सुरेंद्र खरबंदा की बेटी और नतिनी को लाकर फिर क्वॉरेंटाइन सेंटर में रख दिया। नियम के मुताबिक पॉजिटिव पाई गई सुरेंद्र खरबंदा की बेटी को सीधे अस्पताल में दाखिल करना चाहिए था तथा नेगेटिव पाई गई उनकी नतिनी को फिर से को क्वॉरेंटाइन सेंटर नहीं ले जाना चाहिए था। आज 27 जुलाई तक सुरेंद्र खरबंदा की कोरोना पॉजिटिव बेटी और उनकी कोरोना नेगेटिव नतिनी सिदगोड़ा प्रोफेशनल कॉलेज स्थित क्वॉरेंटाइन सेंटर में एक ही कमरे में रह रही हैं। सुरेंद्र खरबंदा का प्रश्न है कि क्या उनकी नतिनी ज्यादा दिनों तक कोरोना नेगेटिव रह पाएगी? खरबंदा ने बताया कि वे क्वॉरेंटाइन सेंटर में अपने बेटी के लिए खुद दवाएं खरीद कर ले जा रहे हैं। सरकार उसे दवाएं भी नहीं दे रही है। सुरेंद्र खरबंदा का दावा है कि उनकी बेटी को कोरोना संक्रमण क्वॉरेंटाइन सेंटर में हुआ। वह लॉक डाउन के बाद अपने घर से कहीं बाहर नहीं निकली थी।

सीतारामडेरा थाना अंतर्गत निर्मल नगर निवासी 26 साल के एक युवक ने डॉक्टर की सलाह पर अपना स्वाब टेस्ट प्राइवेट लेबोरेटरी पाथ काइंड साकची में 22 जुलाई 2020 को कराया। जानकारों के मुताबिक उसका कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया तथा प्राइवेट लेबोरेटरी ने 25 जुलाई को ही युवक की टेस्ट रिपोर्ट सिविल सर्जन को भेज थी। परंतु 2 दिन बीत जाने के बाद भी सिविल सर्जन की टीम को उस युवक के घर जाकर उसे अस्पताल में दाखिल कराने की फुर्सत नहीं मिली। कोविड-19 पॉजिटिव उक्त युवक आज तक अपने घर में रह रहा है। उसके घर में 80 साल की उसकी दादी तथा परिवार के अन्य सदस्य भी हैं। वे काफी डरे सहमे हैं। जबकि प्राइवेट लेबोरेटरी द्वारा सिविल सर्जन को रिपोर्ट देने के बाद फौरन मरीज को घर से ले जाकर अस्पताल में दाखिल कराना स्वास्थ्य विभाग के ड्यूटी है। स्वास्थ्य विभाग की ऐसी ही अनेक लापरवाहियों के कारण जमशेदपुर में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं।

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