जमीन कारोबारी को परेशान कर रुपए मांगने और हरिजन को मोची कहकर मंदिर में नहीं घुसने देने के कारण हुई वकील की हत्या

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वकील की हत्या के राजनीतिक एवं व्यवसायिक कारण नहीं – एसएसपी

जमशेदपुर, 23 जुलाई : जमशेदपुर पुलिस ने काफी सक्रियता दिखाते हुए 24 घंटे के अंदर युवा वकील प्रकाश यादव की हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। पुलिस ने दो हत्यारों और हत्या के लिए सुपारी देने वाले जमीन कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया है।आज सीनियर एसपी एम. तमिल वाणन ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए कहा कि 21 जुलाई 2020 की रात 10:30 बजे प्रकाश यादव नामक वकील की बिरसा नगर जोन नंबर 1 बी हरि मंदिर के पास गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। सीनियर एसपी ने एसपी सिटी सुभाष चंद्र जाट के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया। जिसने छापामारी के क्रम में जमीन की खरीद बिक्री करने वाले सरगना अमूल्य कर्मकार को गिरफ्तार कर लिया। वह बिरसानगर जोन वन बी में जमीन बेचने का कारोबार करता था। पुलिस द्वारा पूछताछ के क्रम में अमूल्य कर्मकार ने हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। उसने हत्या करने वाले युवक राम रविदास उर्फ छोटू और विश्वनाथ मुंडा उर्फ जीतू का नाम भी बताया। पुलिस ने दोनों हत्यारों को गिरफ्तार किया तो उन्होंने भी हत्या की बात स्वीकार कर ली। सीनियर एसपी ने कहा कि अमूल्य कर्मकार ने वकील की हत्या कराने की सुपारी तीन लाख रुपया तय किए थे। जिसमें से दोनों हत्यारों को एडवांस के रूप में 20 हजार रुपए दिए गए थे। पुलिस ने तीनों के स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर हत्या के समय पहने गए कपड़े, हथियार, सुपारी के पैसे, मोबाइल वगैरह बरामद कर लिए। आज सीनियर एसपी ने प्रेस को बताया कि अमूल्य कर्मकार 5 सालों से जमीन बेचने का कारोबार करता था। जब भी वह कोई जमीन बेचता था तो वकील प्रकाश यादव लिखा पढ़ी कर तथा कोर्ट में पिटीशन डालकर अड़ंगा लगाते थे और अंत में उनसे रुपए मानते थे। रुपए देने के बाद भी वे पैर पकड़ने को कहते थे। इस तरह दोनों के बीच पुरानी व्यक्तिगत दुश्मनी थी।

जमीन की खरीद बिक्री करने वाले सरगना अमूल्य कर्मकार

इसके साथ ही वकील प्रकाश यादव की व्यक्तिगत दुश्मनी राम रविदास उर्फ छुटकू तथा विश्वनाथ मुंडा उर्फ जीतू से भी थी। राम रविदास ने पुलिस को बताया कि वे उसे मोची जाति का कहकर मंदिर में बैठने नहीं देते थे। इसके चलते वे वकील से त्रस्त थे। युवा वकील प्रकाश यादव के दोनों दुश्मन आपस में मिल गए। राम रविदास ने अमूल्य कर्मकार से कहा कि उसे रुपए की जरूरत है। अगर वह रुपया खर्च करेगा तो वे वकील का कांड कर सकते हैं। दोनों के बीच 3 लाख रुपए में सौदा हुआ। 20 लाख रूपया एडवांस दिया गया। सीनियर एसपी ने कहा कि घटना के दिन रात को दोनों हत्यारे क्लब में बैठे थे। बरसात हो रही थी। उसी वक्त 10:30 बजे उन्होंने वकील को अकेले फोन पर बात करते हुए देखा। राम रविदास ने लोहे के रॉड से उनके सर पर पीछे से वार किया। वकील के बेहोश होने पर विश्वनाथ मुंडा ने धारदार चाकू से उनका गला रेत दिया। इसके बाद वे दोनों नदी किनारे गए और लोहे की रॉड और चाकू को ठिकाने लगाकर शहर से भाग गए। पुलिस ने इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद इनके स्वीकारोक्ति बयान और निशानदेही पर नदी किनारे चाकू और लोहे के रड की तलाश की। लोहे का रड झाड़ी में मिला, जिसमें खून लगा हुआ था। चाकू नदी की तेज धार के चलते बह गया। काफी मेहनत करने के बाद भी पुलिस चाकू की तलाश नहीं कर सकी। पुलिस ने घटना के समय पहने गए हत्यारों के कपड़े बरामद किए। जिनमें खून लगा था। एक कपड़े को जलाने का प्रयास हत्यारों ने किया था। जो अधजली अवस्था में पुलिस को मिला। पुलिस ने घटनास्थल से वकील के खून का नमूना भी लिया। सीनियर एसपी ने कहा कि लोहे की रड में लगे खून, घटनास्थल से एकत्रित किए गए खून के नमूने और हत्यारों को पहने गए कपड़ों को जांच के लिए एफएलएस में भेजा जाएगा। वकील की हत्या करने और हत्या करवाने वालों ने वकील से व्यक्तिगत दुश्मनी की बात स्वीकार की है। सीनियर एसपी ने कहा कि पुलिस समय सीमा के अंदर अभियुक्तों के खिलाफ कोर्ट में चार्ज सीट भेजेगी तथा मुकदमा का स्पीडी ट्रायल कराएगी। जिससे हत्यारों को जल्दी से जल्दी सजा मिल सके। उन्होंने कहा कि दोनों हत्यारों के आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हैं। हत्या कराने वाले अमूल्य कर्मकार पर 3 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने बताया सुपारी के 20 हजार रूपों में से 5000 रुपये हत्यारों ने अपने खर्च के लिए रखे थे। बाकी 15000 रुपयों में से 7500-7500 रुपये दोनों ने आपस में बंटकर अपने परिवार को दे दिए थे। पुलिस में 19900 रुपये बरामद किए हैं। 

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