जान देकर ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ी प्रखंड विकास पदाधिकारी को, हत्या का आरोप मुखिया दाऊद आलम पर

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जमशेदपुर, 13 जुलाई : झारखंड के एक ईमानदार अफसर को अपनी जान देखकर ईमानदारी की सजा भोगनी पड़ी। झारखंड राज्य के लिए इससे शर्मनाक बात और कोई नहीं हो सकती। ईमानदार अधिकारी पालोजोरी के प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल पदाधिकारी नागेंद्र तिवारी (45) का कसूर इतना था कि वे मुखिया दाऊद आलम के फर्जीवाड़े तथा अपने कर्मचारियों की बेईमानी बर्दाश्त नहीं कर पाते थे। वे जो कदम उठाते थे वह कानून और ईमानदारी की कसौटी में पूरी तरह खरा होता था। इसी कारण वे मुखिया, अपने अधीनस्थ कर्मचारी और अपने बड़े अधिकारी के कोपभाजन बनते थे। मुखिया और बड़े सरकारी पदाधिकारियों द्वारा हमेशा उन्हें अपमानित और प्रताड़ित किया जाता था। किसी भी प्रखंड में उनके आते ही उनको प्रखंड से भगाने के लिए धूर्त मंडली तरह-तरह की साजिश शुरू कर देती थी, पर वे ईमानदारी की ताकत से सब पर भारी पड़ते थे। पश्चिमी सिंहभूम के  तांतनगर प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी के रूप में उन्होंने बालू माफिया के दांत खट्टे किए। पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त अरवा राजकमल ने उन्हें प्रशस्ति पत्र भी दिया। तांतनगर प्रखंड में लोग उनको शेर कहा करते थे। वे वहां गरीब बच्चों को पढ़ाते थे तथा उन्होंने प्रखंड लाइब्रेरी की स्थापना की थी। जहां नवोदय विद्यालय और नेतरहाट स्कूल में दाखिले के लिए वे बच्चों को तैयार करते थे। अनेक बच्चों का दाखिला उनके पढ़ाने से नेतरहाट स्कूल और नवोदय विद्यालय में हुआ। उनकी पहली बहाली सन 2000 में शिक्षक के रूप में हुई। तब से वे गरीब बच्चों को किताबें देकर पढ़ाते थे और खेलने के लिए बॉल वगैरह लेते थे। 2009 में उनकी बहाली सचिवालय सहायक के रूप में हुई तथा 2013 में वे प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास कर प्रखंड विकास पदाधिकारी बने।नागेंद्र तिवारी की क्षत-विक्षत लाश कल शाम 4 बजे जुगसलाई स्थित दुखू मार्केट के पीछे रेलवे पटरी पर पड़ी हुई मिली। उनका चेहरा पहचानना मुश्किल था, इसलिए कल पुलिस में जुगसलाई थाने में यूडी केस दर्ज किया था। आज उनके भाई सुरेंद्र तिवारी ने उनकी पहचान की तब उनका पोस्टमार्टम कराया गया। सुरेंद्र तिवारी पीडब्ल्यूडी कॉलोनी साकची के निवासी हैं। नागेंद्र तिवारी करीब एक महीना पहले से छुट्टी लेकर यहीं रह रहे थे। उनके भाई सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि 12 जुलाई को करीब  12 बजे सुबह वे अपने घर से  मंदिर जाने की बात कह कर निकले।

शाम 7 बजे तक वापस नहीं आए तब उन लोगों ने उनकी खोजबीन शुरू की। बाद में साकची थाना जाकर उनके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि नागेंद्र तिवारी का विवाद पालोजोरी गांव के मुखिया दाऊद आलम से चल रहा था। दाऊद आलम  अपने द्वारा किए गए गलत काम पर नागेंद्र तिवारी को हस्ताक्षर करने का दबाव बनाते थे और धमकी देते थे कि हस्ताक्षर नहीं करने पर उनकी शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। दाऊद आलम ने कई बार उन्हें  औकात में रहने की धमकी दी और कहा कि उन्हें ऐसी जगह फेंक देंगे कि उन्हें पता भी नहीं चलेगा, इसलिए वे अपना तबादला यहां से करा लें। इसके साथ ही दाऊद आलम ने नागेंद्र तिवारी को जान से मारने की धमकी भी दी। दाऊद आलम ने उनसे यह भी कहा कि हम मुखिया हैं जब चाहेंगे तब जमशेदपुर से उठा लेंगे। सुरेंद्र तिवारी ने पुलिस को बताया कि नागेंद्र तिवारी ने उनसे कहा था कि मुखिया दाऊद उनके साथ कोई भी दुर्घटना कर सकता है,  इसलिए नौकरी करनी अब मुश्किल हो गई है। सुरेंद्र तिवारी ने पुलिस के सामने आरोप लगाया कि मुखिया दाउद आलम ने उनके भाई का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी और लाश रेलवे लाइन पर फेंक दी। नागेंद्र तिवारी के भतीजा सुजीत कुमार ने बताया कि नागेंद्र चाचा ने कहा था कि पालोजोरी काम करने लायक जगह नहीं है। यहां उन पर बहुत अवैध दबाव बनाया जाता है। यहां के मुखिया दाऊद आलम उन्हें काम नहीं करने देते। मुख्यमंत्री से शिकायत करते हैं कि प्रखंड विकास पदाधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहा है। नागेंद्र तिवारी ने यह भी कहा था कि वहां के विधायक रणधीर सिंह उन्हें प्रोत्साहित करते हैं तथा ईमानदारी से काम जारी रखने की बात कहते हैं, इसके बाद भी मुखिया तथा उनके बड़े पदाधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारी उन्हें बात-बात पर मानसिक प्रताड़ना देते हैं। बड़े अधिकारी उनको अपशब्द भी कहते हैं। उनसे यहां तक कहा गया कि उनकी नौकरी खा जाएंगे और ईमानदारी का भूत निकाल देंगे। नागेंद्र तिवारी के मित्र कृष्णा पंचोली का कहना है कि उन्होंने कहा था कि अब वे नौकरी छोड़ देंगे तथा फिर से अपने पुराने पेशा शिक्षक के रूप में काम करेंगे। पंचोली ने बताया कि उन्हें डीडीसी अक्सर खरी खोटी सुनाते थे क्योंकि नागेंद्र तिवारी के चलते डीडीसी की ऊपरी कमाई बंद थी।समाचार पत्रों में छपी खबरों के मुताबिक पालोजोरी का पंचायत भवन 20 लाख रुपए की लागत से बना था परंतु बेकार पड़ा था। पंचायत सचिव सुभाष राय पंचायत सचिवालय दूसरे भवन में चला रहा था। तब नागेंद्र तिवारी ने इसका विरोध किया और पंचायत सचिव पर कार्रवाई करने के लिए लिखा पढ़ी की। जब वे तांतनगर में थे तब अवैध बालू ढोने वाले ट्रैक्टरों के सभी छह चक्कों के बाल्ब तोड़ देते थे। पालोजोरी में अवैध कमाई बंद हो जाने के चलते प्रखंड के ज्यादातर मुखिया, पंचायत सचिव और रोजगार सेवकों ने नागेंद्र तिवारी के खिलाफ अभियान चला दिया था।

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