टाटा स्टील में हो सकता है आतंकी हमला, टाटा कारखाने की सुरक्षा व्यवस्था फेल

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कविकुमार
जमशेदपुर, 6 जुलाई : इंटेलिजेंस एजेंसी द्वारा टाटा स्टील के जमशेदपुर कारखााने में आतंकी हमले की संभावना की सूचना देने के बाद भी टाटा स्टील प्रबंधन सुधरनेे का नाम नहीं ले रहा है। आतंकी हमले सेे टाटा स्टील को बचाने की सुरक्षा उपाय खोखले साबित हो रहे हैं। टाटा स्टील प्रबंधन का दावा है कि आतंकी हमले से बचाव के लिए टाटा स्टील कंपनी की पूरी चाहरदीवारी पर इलेक्ट्रिक फेंसिंग की गई है। इससे टाटा स्टील कारखाने की दीवार को छूते ही मात्र दो सेकेंड में कंट्रोल एरिया को सूचना मिल जाएगी। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले का उदाहरण देते हुए टाटा स्टील केे सिक्योरिटी एंड ब्रांड प्रोटेक्शन विभाग के चीफ गोपाल प्रसाद चौधरी ने 18 अक्तूबर 2019 को प्रेस से कहा था कि आतंकी सरकारी इमारतों के बजाय अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझे जाने वाली कंपनियों को निशाना बनाते हैं। इसलिए टाटा स्टील को आतंकी हमले का खतरा है। उन्होंने कहा था कि जमशेदपुर शहर से आतंकी संगठन अल कायदा और आईएसआईएस के आतंकवादियों कटकी और कलीमुद्दीन के तार जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि दो साल पहले बिष्टुपुर कालीबाड़ी के पास डस्टबिन में बम विस्फोट हुआ था। अब कोई भी बाहरी शख्स सीधे टाटा स्टील कारखाना परिसर के अंदर घुस नहीं सकता। उन्होंने बताया था कि टाटा स्टील परिसर 17 किलोमीटर बड़ा है।कंपनी के 15 हजार स्थायी, 35 हजार अस्थायी कर्मचारियों सहित शेयरधारकों, निवेशकों के हितों की रक्षा करने के लिए सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत कर दी गयी है। मौके पर टाटा स्टील, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन चीफ कुलवीन सूरी भी मौजूद थे।परंतु चौंकाने वाली बात यह है की टाटा स्टील सिक्योरिटी चीफ के दावे के विपरीत टाटा स्टील की चारदीवारी पर लगाई गई इलेक्ट्रिक फेंसिंग अब बेकार हो गई है। इसे टाटा स्टील ने करोड़ों रुपए खर्च कर बनवाया था। तब बताया गया था कि इस इलेक्ट्रिक फेंसिंग में जगह-जगह चिप्स लगाए गए हैं। इलेक्ट्रिक फेंसिंग को छूते ही  कंट्रोल रूम को इसका पता 2 सेकंड में हो जाएगा। इसके बाद सेंट्रल तथा स्टेट इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स मौके पर पहुंच जाएगी और टाटा स्टील कारखाने के अंदर प्रवेश करन वाले आतंकवादी या अपराधी को फौरन गिरफ्तार कर लेगी। टाटा स्टील प्रबंधन का यह भी दावा है कि कारखाने में चारदीवारी के पास जगह-जगह पावरफुल कैमरे लगा दिए गए हैं। जिससे कंट्रोल रूम को कारखाने में घुसने वाले की जानकारी स्क्रीन पर फौरन मिल जाएगी। जानकारों के मुताबिक टाटा स्टील को  आतंकवादी से बचाने के सबसे बड़े उपाय  इलेक्ट्रिक फेंसिंग फेल है। संभवत: टाटा स्टील कारखाने की दीवार पर लगे करोड़ों रुपयों के इलेक्ट्रिक फेंसिंग के साथ ही कैमरे भी बेकार हो गए हैं। इस संबंध में ‘आज़ाद न्यूज़’ ने टाटा स्टील की करोड़ों रुपयों की इलेक्ट्रिक फेंसिंग को काटकर कारखाने के अंदर घुसने वाले अज्ञात लोगों के फोटो खींचे हैं। यह सिलसिला पिछले 15 दिनों से रोजाना जारी है। जबकि टाटा स्टील का दावा है कि उसकी इलेक्ट्रिक फेंसिंग को छूने पर मात्र 2 सेकंड के कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी मिल जाएगी। ऐसी हालत में आतंकवादी संगठन आसानी से टाटा स्टील कारखाने में घुसकर बड़ी वारदात कर सकते हैं। मालूम हो टाटा स्टील में जहरीली गैस से भरे विशालकाय टैंक हैं। एक गैस टैंक लीक हो जाने या फटने पर पूरे जमशेदपुर को मौत की नींद सुलाने के लिए काफी है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार और केंद्र सरकार का दायित्वव बनता है कि टाटा स्टील की इस घोर लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाए, क्योंकि टाटा स्टील में लगी हुई ज्यादातर पूंजी टाटा परिवार की नहीं बल्कि वित्तीय संस्थानों की है। जो जनता का पैसा है। टाटा घराने की बहुत कम पूंजी ही टाटा स्टील कारखानेे में लगी है। इसलिए सरकार को आम जनता की जान माल को ध्यान में रखते हुए टाटा स्टील की सुरक्षा व्यवस्था अपनेे हाथों में लेनी चाहिए। टाटा स्टील प्रबंधन विश्वास लायक चौकस नहीं है। 
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