तीन दिनों से पोस्टमार्टम के इंतजार में पड़ी है शिक्षिका की लाश

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कविकुमार

जमशेदपुर, 24 जुलाई : केरला समाजम मॉडल स्कूल साकची की एक शिक्षिका जिसने 32 सालों तक बच्चों को पढ़ा कर कई आईएएस और आईपीएस बनाएं, उसकी लाश 55 घंटों से पूर्वी सिंहभूम जिला के आईएएस और आईपीएस के आदेश का इंतजार कर रही है।
अगर शिक्षिका श्रीमती अजय शर्मा के परिवार के लोग उनकी लाश को ले जाकर टाटा मेन हॉस्पिटल के ठंडा घर में नहीं रखते तो अब तक लाश सड़ गई होती। जबकि यह काम पुलिस का था क्योंकि शिक्षिका के पुत्र ने नर्सिंग होम के संचालक डॉ सुशील कुमार शर्मा के खिलाफ लापरवाही से इलाज करने के कारण शिक्षिका की मौत की लिखित शिकायत 22 जुलाई को ही एमजीएम थाना को दे दी थी। यह अलग बात है कि थाना प्रभारी ने लिखित शिकायत की रिसीव कॉपी शिक्षिका के पुत्र को नहीं दी। घंटों इंतजार कराने के बाद थाना प्रभारी ने कह दिया कि एसपी ने रिसीव कॉपी देने से मना किया है। इस तरह एमजीएम थाना ने सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के उन आदेशों की खुली अवहेलना की, जिनमें शिकायतकर्ता को रिसीव कॉपी देने का आदेश है। शिक्षिका के पुत्र के इस अनुरोध को भी थाना प्रभारी ने नहीं माना कि उनकी मां की लाश मॉर्ग में रखवा दी जाए। 
शिक्षिका का इलाज डिमना लेक रोड स्थित स्मृति सेवा सदन में हुआ था। इसके मालिक दागी डॉक्टर सुशील कुमार शर्मा हैं। पुलिस अधिकारियों का उक्त दागी डॉक्टर के प्रति प्रेम अलग से जांच का विषय है। उक्त डॉक्टर पर लापरवाही से इलाज करने के कई केस हो चुके हैं। कदमा में हुए एक बच्चे की मौत के बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
23 जुलाई 2020 को शिक्षिका अजय शर्मा के पुत्र धीरज खैर ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को पत्र लिखकर मांग की कि उनकी माता का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड के द्वारा वीडियोग्राफी के साथ कराया जाए। जिससे उनकी मौत का सही कारण पता चल सके। शिक्षिका के पुत्र ने डॉक्टरों की लापरवाही के कई बिंदु भी उपायुक्त को लिखित में दिए। इसमें सबसे बड़ा बिंदु यह था कि शिक्षिका दस्त और कै के कारण डॉ सुशील कुमार शर्मा के स्मृति सेवा सदन नर्सिंग होम में दाखिल हुई थी। परंतु डॉक्टर ने उन्हें एक भी सेलाइन नहीं चढ़ाया। 
जबकि उन्हें लगातार 20-25 दस्त हुई थी। जाहिर है इससे उनके शरीर में पानी की काफी कमी हो गई थी। उपायुक्त को दिए पत्र में लिखा है कि उनकी मां का सोडियम लेवल 171 था। जबकि नॉरमल लेवल 130 से 155 के बीच होता है। इसके बाद भी डॉक्टर ने उन्हें ज्यादा नमक खाने की सलाह दी थी। शिक्षिका के पुत्र ने बताया कि जब तक शिक्षिका को मिठाई खिलाई जाति रही, वे भली चंगी थींं। जैसे ही डॉक्टर के कहने पर उन्हें नमक खिलाना शुरू किया गया उनकी तबीयत खराब हो गई। 22 जुलाई 2020 को दोपहर 12:10 बजे अचानक उनकी मौत हो गई। इससे कुछ देर पहले तक वे बातचीत कर रही थीं। शिक्षिका के परिवार के लोगों ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त सूरज कुमार से फोन पर भी बात की और पोस्टमार्टम कराने का आदेश देने की गुहार लगाई। पर 24 जुलाई 2020 रात तक उपायुक्त तथा सिविल सर्जन की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
शिक्षिका के परिवार के लोगों ने 25 जुलाई तक उपायुक्त, सिविल सर्जन और सीनियर एसपी के आदेश का इंतजार करने के बाद लाश का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया है। शिक्षिका के पुत्र ने कहा है कि आगे की लड़ाई में हाईकोर्ट में लड़ेंगे।

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