व्यापारियों को अपने बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की जान की चिंता भी नहीं

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जमशेदपुर, 25 जुलाई : तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमित लोगों और कोरोना से होने वाली मौत को रोकने के लिए झारखंड सरकार ने जो अध्यादेश लाया है वह आम जनता के हित में है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी शंका जाहिर की है कि जमशेदपुर में कोरोना वायरस सामाजिक संक्रमण का रूप ले चुका है। दूसरी तरफ व्यापारी तथा उनके ग्राहक कोरोना से बचाव के लिए सबसे कारगर उपाय सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने के नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। इसे देखते हुए झारखंड सरकार को कड़ा अध्यादेश लाना पड़ा। जिसमें कोरोना से बचाव के नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सील करने, उन पर फाइन लगाने और जेल भेजने का प्रावधान है।कोरोना से पीड़ित लोगों और मरने वाले लोगों की सूची पर गौर करने पर पता चलता है कि अधिकांश लोग गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार के हैं। व्यापारी संगठनों द्वारा हेमंत सोरेन सरकार द्वारा लाए गए इस अध्यादेश का विरोध साफ जाहिर करता है कि व्यापारियों को गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों की मौत की चिंता नहीं है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लोग कीड़े मकोड़े की मौत मरें तो मरें, उनकी दुकान खुलनी चाहिए, नियम का उल्लंघन होना चाहिए और कमाई जारी रहनी चाहिए।सीधी सी बात है कि अगर व्यापारिक प्रतिष्ठान के मालिक कोरोना से अपने तथा अपने ग्राहकों की जान बचाने के नियमों का पालन करेंगे तो न उनको फाइन लगेगा, न ही उनकी दुकानें सील होंगी और न ही उन्हें जेल जाना पड़ेगा। तब इस अध्यादेश का विरोध किस लिए? इस विरोध से साफ जाहिर है कि व्यापारी चाहते हैं कि वे सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करेंगे, मास्क नहीं लगाएंगे और न अपने ग्राहकों को मास्क लगाने के लिए बाध्य करेंगे। मतलब कोरोनावायरस फैलने से रोकने का प्रयास नहीं करेंगे क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें ग्राहक कम मिलेंगे और उनकी आमदनी घटेगी। रुपए कमाने के लोभ में व्यापारी यह भी भूल गए हैं कि उनके घर में भी बच्चे हैं और उनके बूढ़े माता-पिता हैं। सरकारी अध्यादेश को नहीं मानकर वे अपने परिवार के बच्चों और माता-पिता की जान भी खतरे में डाल रहे हैं। ऐसा लगता है कि अध्यादेश का विरोध करने वाले व्यापारियों ने सोच लिया है कि उन्हें अपने माता-पिता और बच्चों के जान से ज्यादा प्यारी लक्ष्मी देवी हैं। ऐसा सोचने वाले व्यापारियों पर अगर कड़े कानून लादें जाएं और पुलिस का डंडे चलें तो यह आम जनता और समाज के हित में ही है।

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