अलकोर वेश्यावृत्ति कांड : सीसीटीवी में कैद अय्याश व्यापारियों के नाम छुपा रही पुलिस

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कविकुमार

जमशेदपुर, 16 अगस्त : बिष्टुपुर पुलिस ने जमशेदपुर के प्रसिद्ध होटल अलकोर में वेश्यावृत्ति करने, कराने और जालसाजी के मामलेे में होटल के मालिक सहित शहर केेेे 7 करोड़पति व्यापारियों, एक महिला और होटल मैनेजर को अप्रैल 2020 में जेल भेज दिया था। वे 1 महीने से ज्यादा जेल में रहे। गिरफ्तार होने वाले सभी व्यापारी भारतीय जनता पार्टी के समर्थक थे। इसलिए हेमंत सोरेन की सरकार के मंत्री चंपई सोरेन में उन्हें जेल की हवा खिलाने में पूरी ताकत लगा दी थी। इस कांड में जांच के दौरान पुलिस ने होटल के डीवीआर और सीसीटीवी कैमरा की पड़ताल की तो करीब दो दर्जन व्यापारियों के चेहरा सामने आए।

पूर्व सीनियर एसपी अनूप बिरथरे कड़ाई से इस कांड की जांच कर अभियुक्तों को जेल भेज रहे थे। इस कांड में बिल्डर चंदन मित्तल का नाम भी सामने आया। चंदन मित्तल हेमंत सोरेन सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के चचेरे साला हैं। अचानक सीनियर एसपी अनूप बिरथरे का तबादला  जमशेदपुर से कर दिया गया। जिससे चंदन मित्तल को जेल जाने से बचाया जा सके। सीनियर एसपी अनूप बिरथरे के तबादले के बाद खानापूरी के लिए 30 अप्रैल 2020 को बिष्टुपुर थाना में पुलिस ने चंदन मित्तल को बुलाकर उनसे पूछताछ की। यह समाचार 30 अप्रैल 2020 को सिर्फ ‘आज़ाद मज़दूर’ ने प्रकाशित किया। बाकी किसी भी दैनिक अखबार में चंदन मित्तल से थाना में की गई पूछताछ का समाचार नहीं छपा। इसके बाद जमशेदपुर पुलिस ने पूरे मामले को कछुआ से भी कम गति दे दी। मसलन पूरे मामले को दबाने की साजिश राजनीतिक दबाव के कारण शुरु हो गई।

3 महीने बाद जमशेदपुर के लोग इस कांड को लगभग भूल गए। जबकि अप्रैल महीने में होटल के सभी सीसीटीवी कैमरों को पुलिस ने देखा था। होटल के कार पार्किंग में लगे कैमरे से वहां रखी सभी कारों के नंबर पुलिस को मिल गए थे। छापामारी के दौरान होटल से भागी दो महिलाओं की जानकारी भी पुलिस को मिली थी। घटनास्थल से भागे गए अन्य व्यापारी के चेहरे भी पुलिस को प्राप्त हुए थे। मालूम हो उस समय लॉकडाउन वन चल रहा था। फिर भी इस कांड में जब सत्ता पक्ष के समर्थक और उनके मित्र फंसने लगे तो पूरे मामले को पुलिस ने निगलने का प्रयास किया। 
परंतु इस मामले में जेल की हवा खाने वाले किसी व्यापारी ने पुलिस के उच्च अधिकारी को पत्र लिखकर जांच शुरू करने की मांग की तथा उन लोगों के नाम भी दिए जो उस समय होटल में मौजूद थे और पुलिस को देखकर भागने में सफल रहे। पत्र मिलने के बाद मजबूर होकर जमशेदपुर पुलिस को अलकोर होटल की फाइल से धूल झाड़नी पड़ी। पुलिस द्वारा उन लोगों की लिस्ट बनाई गई, जो पुलिस छापामारी के दौरान सीसीटीवी में दिखाई दिए थे और पुलिस को चकमा देकर भागे थे।


मजेदार बात यह है कि पुलिस ने उन लोगों को गिरफ्तार करने के बदले में उन्हें नोटिस जारी किया और अपनी सफाई देने का मौका दिया। उनके जवाब से संतुष्ट होने पर पुलिस उन्हें अभियुक्त नहीं बनाएगी। जाहिर है  जमशेदपुर पुलिस जज बन गई है जो अभियुक्त का लिखित जवाब पाने के बाद उसके दोषी होने या निर्दोष होने का फैसला करेगी। जानकारों के मुताबिक ऐसा व्यापारियों को बचाने के लिए किया गया। इसलिए पुलिस जरूर उनके जवाब से संतुष्ट हो जाएगी। सबसे बड़ी बात है कि कितने व्यापारियों को नोटिस जारी किया गया इसे पुलिस ने अति गोपनीय बना कर रखा है। जिसके चलते घूसखोरी का बाजार गर्म है। पुलिस अफसरों के साथ ही कुछ पत्रकार भी घूम घूमकर व्यापारियों से मिल रहे हैं, जो अलकोर होटल में आना-जाना करते थे। उनसे मोटी रकम वसूली जाने की सूचना है। 

अगर जमशेदपुर पुलिस को स्पष्टीकरण मांग कर ही एफआईआर में नाम देना था तो अप्रैल में गिरफ्तार किए गए होटल मालिक राजीव दुग्गल, होटल मैनेजर धनंजय कुमार सिंह, ठेकेदार लड्डू मंगोतिया, रजत जग्गी, शरद पोद्दार, बिल्डर दीपक अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, राजू भालोटिया और कोलकाता की युवती को गिरफ्तार करने की क्या जरूरत थी। उन्हें भी नोटिस देकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए था। मालूम हो इन लोगों की गिरफ्तारी 27 और 28 अप्रैल को की गई थी।विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक पुलिस को जानकारी दी गई कि पुलिस छापामारी के दौरान एएसएल के मालिक दिलीप गोयल, बहु रानी कपड़ा दुकान के मालिक मनोज कांवटिया, सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अशोक भालोटिया, चिंटू भालोटिया, बालमुकुंद गोयल, चंदन मित्तल, साकची के अशोक चौधरी, मनोज मोदी बगैरह वहां मौजूद थे जो छापामारी के दौरान अलकोर होटल के चोर दरवाजे से भाग खड़े हुए।

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