ऐसा होने पर कोरोना संक्रमण से बचेंगे पुलिसकर्मी और पोस्टमार्टमकर्मी

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कविकुमार

जमशेदपुर, 20 अगस्त : पुलिसकर्मी, अस्पताल और पोस्टमार्टम विभाग के कर्मचारी कोरोना संक्रमण से बच सकें इसका कोई इंतजाम स्वास्थ्य विभाग ने नहीं किया है। नतीजा यह हो रहा है कि अधिक संख्या में अनेक थानों के पुलिसकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। समाज के हित में मुस्तैदी से ड्यूटी बजाने वाले पुलिसकर्मियों के बचाव का इंतजाम नहीं करना बेहद खेद जनक है।

ऐसा नहीं कि पुलिसकर्मियों के बचाव के लिए प्रशासन को भारी कठिनाई और रकम खर्च करनी होगी। थोड़ी बुद्धि लगाकर नए नियम बनाकर प्रशासन पुलिसकर्मियों की रक्षा कर सकता है। हाल में दो ऐसे मामले सामने आए जिनसे साफ होता है कि स्वास्थ्य विभाग की जरा सी लापरवाही के कारण पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमण के खतरे में पड़ जाते हैं। 2 अगस्त रविवार की सुबह आज़ाद नगर थाना इलाके में मोहम्मद मिंटू की लाश पड़ी हुई पाई गई। आज़ाद नगर थाना के पुलिसकर्मियों ने मोहम्मद मिंटू की लाश उठवाई। उसे टेंपो में लादा फिर उसे कोविड-19 जांच के लिए महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए। वहां पुलिसकर्मियों ने करीब दो ढाई घंटे लाश साधारण लाशों की तरह बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के रखी। पुलिस के पास संदिग्ध लाशों को प्लास्टिक कवर में लपेटने का कोई इंतजाम नहीं है।

टेंपो में रखी लाश के अगल-बगल से अस्पताल के अनेक मरीज आते जाते रहे। पुलिसकर्मी भी लाश के आसपास ही रहे। वे अस्पताल के अधीक्षक, उपाधीक्षक और सिविल सर्जन से गुहार लगाते रहे की लाश की कोविड-19 जांच कर ली जाए। पर किसी अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी, न ही उन्होंने लाश को अस्पताल के मुर्दाघर में रखा। 2 अगस्त को दिन भर मेहनत करने के बाद भी पुलिसकर्मी मोहम्मद मिंटू की लाश का कोविड-19 टेस्ट नहीं करा सके। मोहम्मद मिंटू के परिजन और निकटवर्ती लोग पुलिस की इस नाकामी से गुस्सा होकर भीड़ जमा करने लगे। कानून व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए आज़ाद नगर थाना के पुलिसकर्मी लाश को पोस्टमार्टम हाउस ले गए तथा मुर्दाघर में लाश रखवा दी।

मुर्दाघर के कर्मचारी, मोहम्मद मिंटू के परिवार के लोगों और दोस्तों ने लाश उठाकर मुर्दाघर के अंदर रखी। 3 अगस्त को भी पुलिस ने लाश का कोविड-19 टेस्ट करने का आग्रह सिविल सर्जन और एमजीएमसीएच के पदाधिकारियों से किया। पुलिस के अधिकारी ने उनका टालमटोल रवैया देखा तो खुद सिविल सर्जन ऑफिस खासमहल जाकर बैठ गए। तब सिविल सर्जन में रैपिड एंटीजन कीट के साथ लोगों को भेजा और दोपहर 1:30 बजे मोहम्मद मिंटू की जांच कराई। जिसमें वह कोविड-19 का मरीज पाया गया। इस तरह जांच में टालमटोल करने के कारण टेंपो वाला, एमजीएम अस्पताल के अनेक मरीज, पोस्टमार्टम विभाग के मुर्दाघर के कर्मचारी, लाश उठाने वाले मृतक के परिजन और दोस्त कोरोना संक्रमण संदेह के घेरे में आ गए। 

अगर 2 अगस्त को ही एमजीएमसीएच अस्पताल में लाश का रैपिड एंटीजन टेस्ट कर दिया जाता है तो अनेक लोग संक्रमण के संदेह के घेरे में नहीं आते। टाटा मेन हॉस्पिटल में किसी भी लाश के जाने पर उसे फौरन प्लास्टिक में डाल कर मुर्दाघर में रखा जाता है। जिससे संक्रमण फैलने की गुंजाइश खत्म हो जाती है। परंतु महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लाई गई लाश के साथ सावधानी नहीं बरती जाती। उसे इसी तरह मुर्दा घर में रख दिया जाता है। जिससे मुर्दाघर में अन्य लाशों को निकालने घुसाने वाले परिवार के लोगों के साथ ही मुर्दाघर के कर्मचारी और पुलिसकर्मी संक्रमण के शिकार हो सकते हैं।

इसके अलावा भी गिरफ्तार अपराधकर्मियों को जेल भेजने से पहले जांच के लिए अस्पताल ले जाते वक्त पुलिसकर्मी उनके बगल में सटकर बैठने को मजबूर हैं क्योंकि वाहन के पीछे जहां गिरफ्तार को बैठाया जाता है, वहां इतनी जगह नहीं होती कि गिरफ्तार और पुलिस पुलिसकर्मी सोशल डिस्टेंस मेंटेन कर बैठ सकें। अनेक कैदी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जिसके चलते पुलिसकर्मी भी कोरोना संक्रमण के शिकार हुए। इससे बचने के लिए हर एक पुलिस जीप दो पुलिसकर्मियों को पीपीपी किट देकर बचाया जा सकता है।

जानकार लोगों का कहना है कि अगर उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम ऐसा आदेश दे दें कि धालभूम अनुमंडल के सभी थाना इलाकों की लाशों का कोरोना टेस्ट एमजीएमसीएच अस्पताल फौरन करे तथा घाटशिला अनुमंडल के थाना इलाकों की लाशों का कोरोना टेस्ट घाटशिला अनुमंडल अस्पताल में फौरन किया जाए, जिससे घाटशिला अनुमंडल की लाशों को जमशेदपुर पोस्टमार्टम हाउस न लाकर उनका पोस्टमार्टम घाटशिला मैं ही हो जाए। ऐसी व्यवस्था होने पर अनेक पुलिसकर्मी और पोस्टमार्टमकर्मी कोरोना संक्रमण से बचेंगे। साथ ही घाटशिला अनुमंडल से लाश के साथ जमशेदपुर आने वाले ग्रामीण अतिरिक्त खर्च और तबाही से छुटकारा पाएंगे। अनेक ग्रामीण अपने बकरी और बैल बेचकर पैसा जुटाते हैं और लाश लेकर जमशेदपुर पहुंचते हैं। डीसी का एक आदेश उन्हें अनेक कठिनाइयों से बचा सकता है।

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