अपने मुख्यमंत्री के आदेश की भी ऐसी तैसी कर रहे हैं जेएमएम के विधायक

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कविकुमार

जमशेदपुर, 30 सितंबर : आज पूर्वी सिंहभूम जिला झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साबित कर दिया कि उन्हें अपने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश की भी परवाह नहीं है। जमशेदपुर में कोविड-19 के मरीज बढ़ रहे हैं तथा मरने वालों की संख्या भी कम नहीं हुई है। कमोबेश यही हालत पूरे झारखंड की है। इसे देखते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सख्त आदेश दिया है कि 2 मीटर कि सोशल डिस्टेंस का कड़ाई से पालन किया जाए तथा चेहरे पर सही तरीके से मास्क लगाया जाए।

परंतु आज झारखंड मुक्ति मोर्चा जिला कमेटी के लोगों ने केंद्र सरकार के कृषि विधेयक का विरोध करते हुए कोविड-19 के सभी नियमों की धज्जियां उड़ा दी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भीड़ में झारखंड मुक्ति मोर्चा के दो विधायक रामदास सोरेन और मंगल कालिंदी भी शामिल थे। झारखंड मुक्ति मोर्चा समर्थकों की भीड़ इतनी थी की डीसी कार्यालय के मुख्य द्वार को इन लोगों ने जाम कर दिया। डीसी ऑफिस के सामने की सड़क पर भी जाम लग गया। यह स्थिति घंटे भर से ज्यादा रही।

भीड़ में शामिल अनेक लोगों ने मास्क नहीं पहना था। जो लोग मास्क पहने थे उन्होंने भी सही तरीके से नहीं पहना था। खुद विधायक रामदास सोरेन ने मास्क से अपनी नाक नहीं ढकी थी।हालात बिगड़ते देख धालभूम के नए अनुमंडल पदाधिकारी नीरज कुमार ने नेताओं को समझाया कि वे कोरोना को देखते हुए सोशल डिस्टेंस मेंटेन करें, परंतु झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं ने उनकी बात नहीं मानी। तब अनुमंडल पदाधिकारी ने सख्त लहजे में उन्हें चेतावनी दी।

दोनों विधायक उनसे उलझ गए और दोनों ने मुख्यमंत्री से अनुमंडल पदाधिकारी की शिकायत करने की बात कही। मालूम हो जब से जिला में अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में नीरज कुमार आए हैं तब से सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने वालों या गुटखा वगैरह बेचने वालों पर कड़ाई से कार्रवाई की जा रही है। जिससे कोविड-19 की रोकथाम हो सके। परंतु दोनों विधायकों ने अनुमंडल पदाधिकारी को धमकी देकर यह साबित कर दिया कि उन्हें जनता की जान से ज्यादा अपनी राजनीतिक चमकाने की चिंता है।

यह सब जानते हैं कि केंद्र सरकार ने जो विधेयक पारित किया है उसे झारखंड की राज्य सरकार झारखंड में लागू होने से रोक सकती है। ऐसी स्थिति में जुलूस निकालना सिर्फ राजनीतिक चमकाना ही कहा जा सकता है। कोरोना काल में ऐसा करना जनता को अपने विरोध में खड़ा करने के समान है परंतु झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता यह नहीं समझ पा रहे हैं। याद रहे लॉकडाउन के बाद कांग्रेस के नेताओं ने सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन पर डीसी ऑफिस के सामने इसी तरह का प्रदर्शन किया था। उस वक्त सभी नेताओं के खिलाफ उपायुक्त के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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