ऑक्सीजन न ले पाने के कारण मौत का सिलसिला 18 सालों से जारी

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कविकुमार

जमशेदपुर, 21 सितंबर :  पूर्वी सिंहभूम जिले में  सिलिकोसिस रोग से गरीब मज़दूरों के मरने का सिलसिला 18 सालों से जारी है। इस जिले में सिलिकोसिस का पहला मरीज 2002 में मुसाबनी  में मरा था। पूर्वी सिंहभूम जिले में सिलिकोसिस रोग सफेद रंग के क्वार्टज पत्थरों को पीटने वाले कारखानों से फैला। पत्थरों के बारीक कण मज़दूरों के फेफड़ों में जम गए। जिससे उनके फेफड़े बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी और अंततः ऑक्सीजन नहीं ले पाने के कारण दम घुटने से उनकी मौत हो गई। 

मौत के इस सिलसिले ने कल शाम 6 बजे पुर्नापानी मुसाबनी के निवासी मज़दूर हाथी सबर को मौत की नींद सुला दिया। उसकी तबीयत गंभीर रूप से खराब होने पर कुछ ही दिन पहले एमजीएम में लाकर उसकी जांच कराई गई थी। पर इस मारक रोग से डॉक्टर उसे नहीं बचा पाए। ओशाज संस्था के महासचिव समित कुमार ने झारखंड सरकार से निवेदन किया है कि राज्य सरकार सिलिकोसिस से ग्रसित एवं इस बीमारी से मृत सभी मज़दूरों के आश्रितों को हरियाणा सरकार के अनुसार सामजिक सुरक्षा दे। उन्होंने जानकारी दी कि झारखण्ड के पूर्वी सिंहभूम जिला के मुसाबनी, डुमरिया, धालभूमगढ़, बहरागोड़ा, गुड़ाबांधा एवं पोटका क्षेत्र के तकरीबन 1600 से भी अधिक मज़दूर विभिन्न समय में क्वार्टज पत्थर से पाउडर बनाने वाली कम्पनी में कार्यरत रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार बहरागोड़ा छोड़ कर अन्य सभी ब्लॉकों के राम्मिंग मास इकाइओं के 800 से भी अधिक मज़दूरों में से 180 से 200 मज़दूरों की मौत सिलिकोसिस के कारण हो चूकी हैं। चूंकि सिलिकोसिस पीड़ित रोगियों को टी.वी. होने का खतरा 15 गुना अधिक रहता है। सही जाँच और इलाज के आभाव से धूल में कार्यरत मज़दूरों की मौत का कारण टी. वी. लिख दिया जाता है। अधिकांश डॉक्टर भी सिलिकोसिस पीड़ित रोगियों की मौत टी. वी. से होने की बात लिखते हैं। मुसाबनी क्षेत्र के करीब 180, डुमरिया के 50, धालभूमगढ़ के 30 एवं पोटका के 25 लोग सिलिकोसिस बीमारी से गंभीर रूप से ग्रसित हैं।

ज्ञातव्य है कि पोटका स्थित एक कारखाने में पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिला से 30 प्रवासी मज़दूरों का आगमन हुआ था। 8-10 महीने काम करने के पश्चात्  झारग्राम जिला के 9 मज़दूरों एवं पोटका के 8-9 मज़दूरों की मौत हो चुकी है। इतनी मौतों के बाद भी सरकारी नियामक विभागों द्वारा सिलिकोसिस की रोकथाम की दिशा में समुचित कार्यवाही नहीं की गयी। जबकि ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ झारखण्ड के महासचिव समित कुमार कार के द्वारा झारखण्ड सरकार के लिए तैयार किए गए सिलिकोसिस रोकथाम एवं निरामय हेतु कार्य योजना, जिसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अनुमोदन के पश्चात् तैयार किया गया था, को लागू नहीं किया गया।

जिसके कारण ऐसी कंपनियों के कार्यक्षेत्र अभी भी असुरक्षित बने हुए हैं। जिससे मज़दूरों का सिलिकोसिस से ग्रसित होना और मरने का सिलसिला आज भी जारी है। अब तक मुसाबनी क्षेत्र के मात्र 33 एवं सरायकेला-खरसवां व पश्चिम सिंहभूम जिले के 9, कुल 42 सिलिकोसिस से मृत श्रमिकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है।

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