टाटा पावर के फ्लाई एश से गांव और जंगल का सत्यानाश

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जमशेदपुर, 4 सितंबर : संयुक्त ग्राम विकास समिति जमशेदपुर के अध्यक्ष राम सिंह मुंडा ने टाटा पावर कंपनी के फ्लाई एश पॉन्ड एवं फ्लाई एश डस्ट से होने वाले प्रदूषण का मामला उठाते हुए कहा है कि टाटा पावर के प्रदूषण का खामियाजा स्थानीय लोग भुगत रहे हैं। टाटा पावर  मैनेजमेंट के आगे जिला प्रशासन और झारखंड सरकार नतमस्तक है। जिला प्रशासन के रवैया से दुखी होकर श्री मुंडा ने कहा कि अब जनता का सहारा और भरोसा माननीय न्यायालय पर ही है।

इस मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी। इसकी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राम सिंह मुंडा ने बताया कि लगभग 30 एकड़ भूमि पर फैले यूकेलिप्टस के बरसो पुराने में लगभग 10-15 फीट ऊंचाई तक फ्लाई एश डंप करने के कारण पेड़ की हरियाली खो रही है। इससे जलवायु प्रदूषण क्षेत्र में फैलने का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही फ्लाई एश पॉन्ड में लोडिंग अनलोडिंग एवं ट्रांसपोर्टिंग से उड़ने वाले डस्ट के कारण, आसपास की बस्तियों में बुरा प्रभाव पड़ रहा है। क्षेत्र के लोग सांस, दमा, फेफड़े आदि की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। प्रदूषण के शिकार लोग असमय मौत के मुंह में चले जा रहे हैं।

श्री मुंडा ने कहा कि जिसका जीता जागता उदाहरण आसपास के बस्तियां आज़ाद बस्ती, सुपुडेरा, बामनगोड़ा, सरजामदा, शांतिनगर, लोको कॉलोनी, बारीगोड़ा, राहरगोड़ा आदि क्षेत्र हैंं। इसके अलावा टाटा पावर द्वारा निर्मित इस पॉइंट से रिसने वाले पानी में समय-समय पर फ्लाई एश प्रवाहित किया जाता है। जो एक नाला से होकर गुजरता है। जिससे लगभग 15 किलोमीटर दूर तक सीधे तौर पर कृषिकार्य पर प्रभाव पड़ता है। जिस क्षेत्र, गांव, खेत में उक्त नाला का पानी प्रवाहित होता है उस क्षेत्र में खेती का सत्यानाश हो जाता है। साथ ही जिन क्षेत्रों से होकर नाला गुजरता है उन क्षेत्रों के लोग नाला के पानी से नहाते हैं, जिससे लोगों में चर्म रोग हो रहा है।

फ्लाई एश प्रदूषण की गंभीर समस्याओं की जानकारी समय-समय पर संयुक्त ग्राम विकास समिति के माध्यम से टाटा पावर कंपनी प्रबंधन, प्रशासन एवं सरकार को दी जाती रही है। परंतु कंपनी प्रबंधन को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। 11 फरवरी 2020 को जिला के उपायुक्त, जिला के वन क्षेत्र पदाधिकारी, वन प्रमंडल पदाधिकारी और 12 फरवरी को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद आदित्यपुर एवं 28 फरवरी 2020 को पुनः अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम को लिखित आवेदन देने के बावजूद किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। उल्टे धड़ल्ले से टाटा पावर प्लांट के अधिकारियों द्वारा बरसों पुराने यूकेलिप्टस के जंगल में फ्लाई एश की डंपिंग की गई। 

आज परिणाम यह है कि उक्त जंगल का स्वरूप बदल कर एक सूखा जंगल बन गया है,  जिस पर न स्थानीय नेताओं का ध्यान जा रहा है, न जिला प्रशासन का। जबकि क्षेत्र के विधायक सरजू राय खुद एक पर्यावरणविद हैंं। 

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