थाना में नाबालिग से बलात्कार और वेश्यावृति कांड में 1 साल बाद अचानक सीआईडी सक्रिय

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कविकुमार

जमशेदपुर, 20 सितंबर : अचानक 1 साल बाद सीआईडी की नींद खुली। सीआईडी की इंस्पेक्टर ज्योत्सना बिना सूचना दिए जांच के लिए कल मानगो सहारा सिटी नानक चंद सेठ के घर पहुंचीं। वहां उन्होंने सामूहिक बलात्कार तथा वेश्यावृत्ति की शिकार युवती से साढ़े 3 घंटे तक बातचीत की और उससे 2.9 साल पुरानी पूरी घटना को फिर से पूछा। घटना के समय यह युवती नाबालिक बच्ची थी।

ऐसा नहीं कि सीआईडी ने पहली बार यह पूछताछ की। सीआईडी की एक एसपी और एक डीएसपी करीब आधा दर्जन बार पीड़ित युवती से पूछताछ कर चुके हैं। इस बार सीआईडी की पदाधिकारी ज्योत्सना ने बताया कि वह सीआईडी के आईजी अनिल पलटा के आदेश से जांच के लिए आई हैं। मालूम हो रघुवर सरकार के वक्त नाबालिक बच्ची जनता दरबार में मुख्यमंत्री रघुवर दास के पास गई थी। उसने अपने साथ थाना प्रभारी एमजीएम और डीएसपी पटमदा द्वारा थाना में बलात्कार करने तथा शहर के कई राजनीतिक एवं पूंजी पतियों द्वारा बलात्कार करने एवं वेश्यावृत्ति के पेशे में धकेलने की बात बताई।

तत्काल मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस मामले की जांच सीबीआई से न करा कर सीआईडी से कराने की बात कही। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सीआईडी को आदेश दिया था कि वह 1 महीने के अंदर जांच कर रिपोर्ट दे। परंतु सीआईडी 2 .9 साल में भी जांच रिपोर्ट नहीं दे पाई। सीआईडी अफसर ज्योत्सना ने पीड़िता से कुकर्म करने वाले लोगों के नाम पूछे तथा उन लोगों ने किस किस स्थान में कुकर्म किया इसकी जानकारी ली। पीड़िता ने बताया कि एमजीएम के थाना प्रभारी इमदाद अंसारी और पटमदा के डीएसपी अजय लाकड़ा ने उसके साथ एमजीएम थाना में बलात्कार किया। इसके अलावा उसने अन्य सभी बलात्कारियों के नाम बताएं, जिनमें कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के लोग भी शामिल हैं।

इनके द्वारा नेशनल हाईवे के होटलों में बलात्कार करने की बाद पीड़िता ने बताई। पीड़िता ने झारखंड के मंत्री के बड़े भाई का नाम भी सीआईडी अधिकारी ज्योत्सना को बताया। उसे वेश्यावृत्ति की ट्रेनिंग देने वाली बंगाली युवती का नाम और पता भी बताया। उसका गर्भपात कराने वाले साकची के नर्सिंग होम का नाम और पता भी उसने  सीआईडी को बताया।मालूम हो इस कांड में अभी दो अभियुक्त जेल में हैं। एक अभियुक्त जमानत पर है। बाकी दर्जनभर अभियुक्त के खिलाफ पीड़िता ने जमशेदपुर कोर्ट में जज के सामने अपना बयान पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज करा दिया है।

कोर्ट में पीड़िता और उनके संरक्षक गवाहों का क्रॉस एग्जामिनेशन भी पूरा हो चुका है। मुकदमा अपने अंतिम स्टेज में है। वैसे समय में 1 साल बाद सीआईडी का पुनः सक्रिय हो जाना संदेह उत्पन्न करता है। मालूम हो सीआईडी पूरी तरह राज्य सरकार के अधीन होता है। वैसे वक्त में सीआईडी  सक्रिय हुआ जब हेमंत सोरेन सरकार के एक मंत्री के बड़े भाई आरोपी हैं। बहरहाल इस जांच में सीआईडी कि अधिकारी ज्योत्सना को यह जानकारी मिली कि जेल में बंद अभियुक्त इंद्रपाल सैनी उर्फ निट्टू के उस मोबाइल का कॉल डिटेल पुलिस ने नहीं निकाला, जिस मोबाइल से वह ज्यादा बात करता था। क्योंकि वह मोबाइल जियो कंपनी का था और उस वक्त जियो कंपनी ने फ्री टॉकटाइम दिया था। इंद्रपाल सैनी ने ही अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर पीड़िता को वेश्यावृत्ति के धंधे में झोंका था।

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