देवानंद ने अपने लिए राज्य सभा की सीट नहीं मांगी थी

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सुरेंद्र किशोर

शेखर कपूर ने लिखा है,‘मेरे अंकल देवानंद और विजय आनंद आपातकाल के खिलाफ खड़े होने वाले शुरूआती लोगों में से थे।उन्होंने रैलियां कीं और इंदिरा गांधी को, उन्हें गिरफ्तार करने की, चुनौती दी।अपने सिद्धांतों के लिए उन्होंने अपने कैरियर और जिंदगी को दांव पर लगा दिया।वह बड़ी साहसिक ललकार थी।’

कुछ शब्द मेरी तरफ से–फिल्मी हस्तियों के बारे में भी मैं थोड़ा-बहुत पढ़ता रहा हूं। मैंने कभी यह नहीं सुना या पढ़ा कि देवानंद ने किसी से अपने लिए राज्य सभा की सीट मांगी थी।
कई दशक पहले ‘स्वामी दादा’ फिल्म को लेकर देवानंद के खिलाफपटना में मुकदमा हुआ था।वह दिलचस्प मुकदमा था।उस पर मैं कभी बाद में विस्तार से लिखूंगा।उस मुकदमे की रिर्पोटिंग मैंने लगातार ‘जनसत्ता’ में की थी।


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