प्रशासन को ‘ब्लैकमेल’ करने की कोशिश में ‘कनवा राजा’ टाटा मेन हॉस्पिटल

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कविकुमार

जमशेदपुर, 1 सितंबर : कोरोना काल में संक्रमित मरीजों और उनकी लाशों के रखरखाव में लापरवाही बरतने वाला टाटा मेन हॉस्पिटल अब जिला प्रशासन को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है। ऐसा कल की घटना के बाद टाटा मेन हॉस्पिटल ने कोविड-19 बेड की संख्या घटाने की चेतावनी देकर किया है। 

कल टूईलाडुंगरी गोलमुरी के निवासी एक मरीज के परिजन व मित्रों ने जमकर विरोध किया। जिससे हंगामा के हालात पैदा हो गए। पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात पर काबू पाना पड़ा।सूत्रों के मुताबिक गोलमुरी का मरीज सांस लेने में तकलीफ के कारण 29 अगस्त को टीएमएच में भर्ती कराया गया। रैपिड एंटीजन टेस्ट में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद भी टाटा मेन हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने उन्हें इलाज के लिए कोविड वार्ड में शिफ्ट कर दिया। इसका विरोध रोगी के परिवार वालों ने किया। उन्होंने कहा कि उनका मरीज कोरोना निगेटिव है, पर उसे कोरोना मरीजों के साथ कोविड वार्ड में डालकर संक्रमित किया जा रहा है। मरीज के परिजन और साथियों ने डॉक्टरों को भला बुरा कहा और मारपीट पर उतारू हो गए। मरीज ने अपने परिवार वालों को बताया कि कोविड-19 वार्ड में उसे देखने वाला कोई नहीं है। न यहां डॉक्टर जांच करने आते हैं और न नर्सें। 

ऐसा नहीं कि टाटा मेन हॉस्पिटल की यह पहली बदइंतजामी है। इससे पहले एक कोरोना संक्रमित मरीज की लाश टाटा मेन हॉस्पिटल ने उनके परिवार वालों को गैर संक्रमित समझ कर दे दी। मरीज के परिवार वालों ने साधारण रोगियों के समान लाश को स्वर्णरेखा घाट में जला दिया। जबकि नियम के मुताबिक कोविड-19 संक्रमित मरीज की लाश को उसके परिवार वालों को नहीं देना है तथा पूरी सावधानी के साथ जिला प्रशासन को उसका अंतिम संस्कार कराना है। टाटा मेन हॉस्पिटल की इस गलती से कितने लोगों में कोरोना का संक्रमण फैला होगा, यह जांच का विषय है।

अनेक बार ऐसी घटनाएं घटींं जब कोरोना संक्रमित की लाश लेने उसके परिवार वाले लाश घर पहुंचे और वहां देखा कि बिना पीपी किट पहने ही टाटा मेन हॉस्पिटल के कर्मचारी लाश निकाल रहे हैं। जब मृतक के परिजन ने उन्हें बताया कि यह लाश कोरोना संक्रमित की है तो कर्मचारी भागने लगे। मृतक के परिजन के पास जो पेपर था उसमें लाश के बारे में कोरोना संक्रमित लिखा गया था परंतु लाश निकालने वाले कर्मचारियों को इसकी सूचना नहीं थी।

सप्ताह भर पहले एक कोरोना संक्रमित मरीज की लाश मुर्दा घर से निकाल कर एंबुलेंस में रख दी गई। उनके परिजन को दिए गए पेपर में लाश कोरोना संक्रमित नहीं थी, पर पुलिस को दिए गए पेपर में लाश को कोरोना संक्रमित लिखा गया था। कुछ देर बाद टाटा मेन हॉस्पिटल के कर्मचारी बिना पीपी किड पहने हुए आए और एंबुलेंस में चढ़कर लाश को प्लास्टिक में बंद करने लगे। इस पर परिजनों ने पूछा कि जब लाश कोरोना संक्रमित नहीं है तो प्लास्टिक में इसे क्यों बंद किया जा रहा है और अगर लाश कोरोना संक्रमित है तो मॉर्ग से उसे बिना प्लास्टिक में लपेटे बिना पीपी किट पहने कर्मचारियों ने कैसे निकाल लिया। इस बात पर मृत मरीज के परिजन और पुलिस शिविर के अधिकारियों के बीच काफी तू तू मैं मैं हुई। 

ऐसी अनेक भयंकर गड़बड़ियां टाटा मेन हॉस्पिटल प्रबंधन कर चुका है। इसके वीडियो और फोटो सोशल मीडिया में वायरल हो चुके हैं। इसके बाद भी अगर लोग विरोध न करें तो कोरोना के फैलाव को कैसे रोका जा सकता है?ऐसी भी सूचना है कि टाटा मेन हॉस्पिटल के डॉक्टर अपने वैसे कर्मचारियों को जबरदस्ती अस्पताल में बुलाकर ड्यूटी करवाते हैं जो सरकार द्वारा क्वारंटाइन में हैं तथा जिनका घर जिला प्रशासन ने सील कर रखा है। ऐसे संदिग्ध संक्रमित कर्मचारी टाटा मेन हॉस्पिटल के गैर संक्रमित रोगियों का इलाज करते हैं। वैसी स्थिति में टाटा मेन हॉस्पिटल में दाखिल होने पर अन्य रोगी भी कोरोना संक्रमित हो जाएं तो आश्चर्य की बात नहीं। 

वैसे भी टाटा मेन हॉस्पिटल जमशेदपुर के अन्य हॉस्पिटलों की तुलना में अंधों की नगरी में कनवा राजा है। अगर कनवा राजा प्रशासन को यह कहकर धौंसाए कि वह कोविड-19 बेड घटा देगा तो यह चौंकाने वाली बात है। हाल ही में प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहर लाल शर्मा ने बयान जारी कर कहा है कि टाटा जमीन लीज समझौते के मुताबिक जमशेदपुर की जनता को स्वास्थ्य सेवा देने की जिम्मेदारी टाटा स्टील की है। इस जिम्मेदारी के बदले में टाटा स्टील को मिट्टी के मूल्य पर जमीन लीज पर दी गई है। अगर टाटा स्टील अपनी इस शर्त का पालन नहीं करता है तो वह गैरकानूनी हरकत करता है साथ ही अपने संस्थापक जेएन टाटा के सपनों को चकनाचूर करता है।

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