मुस्लिम पुरुष के बदले हिंदू महिला की लाश दे दी, रांची जिला प्रशासन की भयंकर लापरवाही

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कविकुमार
जमशेदपुर, 5 सितंबर : अगर मुस्लिम रीति के मुताबिक नमाज पढ़ने के बाद कब्रिस्तान में मृतक का चेहरा देखने का रिवाज नहीं होता तो आज काफी आपत्तिजनक घटना घट जाती। साकची कब्रिस्तान में गैर मुस्लिम महिला की लाश दफना दी जाती। इससे कानून व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो सकती थी। परंतु मुस्लिम रीति रिवाज के चलते यह अनहोनी नहीं हुई।

घटना के बारे में बताया जाता है कि आज़ाद नगर मानगो के निवासी एक कपड़ा व्यापारी की तबीयत सप्ताह भर से खराब थी। उन्हें निमोनिया की शिकायत थी। उन्हें इलाज के लिए रांची स्थित एस्क्लेपियस  अस्पताल में 1 सितंबर को दाखिल कराया गया। कल अस्पताल में उनकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने उन्हें कोरोना पॉजिटिव बताया। आज सुबह 11 बजे उनके परिवार के लोगों ने रांची के अस्पताल से उनकी लाश प्राप्त की। लाश देते वक्त रांची जिला प्रशासन की टीम वहां मौजूद थी। उनकी देखरेख में कपड़ा व्यापारी की लाश दी गई।

मृतक के परिवार वालों ने लाश लेते वक्त मुंह देखने की इच्छा जाहिर की, परंतु अस्पताल के डॉक्टर आशिफ और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इसे गैरजरूरी बताते हुए नजरअंदाज कर दिया। लाश आज करीब 3:30 साकची स्थित कब्रिस्तान में पहुंची। जहां सुपुर्द ए खाक करने से पहले मृतक के परिजनों ने पीपी किट पहनकर मृतक का चेहरा देखा। यह देखकर वे अवाक रह गए कि कपड़ा व्यापारी के बदले में किसी महिला की लाश उन्हें दे दी गई है।

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक महिला गैर मुस्लिम समुदाय की थी। अगर उसे सुपुर्द ए खाक कर दिया जाता तो अलग हंगामा खड़ा होता। बहरहाल कपड़ा व्यापारी के रिश्तेदारों ने कब्रिस्तान में हंगामा खड़ा किया। मौके पर जमशेदपुर के पुलिस पदाधिकारी पहुंचे और उनकी बातें सुनींं। मृतक के रिश्तेदार रियाज शरीफ ने कहा कि झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को इस संदर्भ में मैदान में आकर जवाब देना चाहिए। उनका स्वास्थ्य विभाग क्या कर रहा है?

उन्होंने कहा कि रांची में ही लाश को ट्रांसपेरेंट कवर में देना चाहिए था, जिससे लोग उसका चेहरा देख पाए। रांची में लाश की पहचान क्यों नहीं कराई गई? मृतक के भाई ने कहा कि अस्पताल के डॉक्टर आसिफ दलाल किस्म के व्यक्ति हैं। उन्होंने रोगी का सही इलाज नहीं किया तथा 20-25 हजार रोज का बिल बनाया। अंत में डॉक्टर ने रोगी पर आरोप लगाया कि रोगी ने ऑक्सीजन पाइप खुद निकाल दिया।

मृतक के भाई ने कहा कि अस्पताल के डॉक्टर बार-बार मुस्लिम होने की बात कहकर खुद को सच्चा व्यक्ति बताते हैं और अपने मरीजों को धोखा देते हैं। उनके अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग द्वारा फौरन बंद कर आना चाहिए। साकची कब्रिस्तान में मृत कपड़ा व्यापारी के परिजन एवं मित्रजन काफी नाराज दिखाई दिए। सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता तक यह बात पहुंचाई गई। बन्ना गुप्ता ने इस घटना को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया।

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