दुमका उपचुनाव में बेसरा के 10 सवाल

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झारखंड मुक्ति मोर्चा की पोल खोल। भारतीय जनता पार्टी का भंडाफोड़।।

झारखंड राज्य निर्माताओं में एक आजसू के संस्थापक सह झारखंड पीपुल्स् पार्टी (जेपीपी) के प्रस्तावित उम्मीदवार सूर्य सिंह बेसरा ने आज से झारखंड के जनमानस के हित में प्रतिदिन 10 (दस) सवाल सत्ता पक्ष और विपक्ष को पूछने का दृढ़संकल्प लिया है, सवाल निम्न प्रकार हैंं:-

1, 15 नवम्बर 2000 यानि बिरसा मुंडा की जयन्ती के अवसर पर देश के 29 वें राज्य के रूप मे झारखंड की स्थापना हुई थी। क्या “आबुआक् दिशुम-आबुआक् राज ” कायम हुआ ? 2, झारखंड राज्य क्यों? और किसके लिए बना है? क्या बिहार में बिहारी, बंगाल मेंं बंगाली, उड़ीसा मेंं उड़िया, पंजाब मेंं पंजाबी, गुजरात मेंं गुजराती, महाराष्ट्र मेंं मराठी की तरह झारखंड मे भी झाड़खंडी राज्य होगा? 3, बृहत झारखंड और बेहतर झारखंड कब बनेगा? संविधान के अनुच्छेद- 3 (क) के मातहत वर्तमान झारखंड के साथ बंगाल उड़ीसा और छत्तीसगढ चार राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों को शामिल करने के केंद्र की भाजपा सरकार कब पहल करेगी ?

4, संविधान के अनुच्छेद- 345, 346, 347 के तहत प्रत्येक राज्य के लिए राजभाषा का प्रावधान है, परन्तु झारखंड राज्य मेंं झाड़खंडी भाषाओं को अभी तक क्यों मान्यताप्राप्त नही दी गई है? 5, 2012 मेंं भाजपा के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, झामुमो के उपमुख्य मंत्री हेमंत सोरेन और आजसू पार्टी के उप मुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो के मंत्रिमंडल की बैठक मेंं संताली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, खाड़िया, नागपुरी, कुरमाली, खोरठा और पंचपरगनिया के अलावे उर्दू समेत बंगला और उड़िया भाषाओं को झारखंड की द्वितीय राजभाषा के रूप मे मान्यता प्राप्त की गई है, परन्तु आज तक इसे लागू क्यों नहींं किया गया?

6, संविधान के अनुच्छेद- 350 (क) के मातहत ” मातृभाषा मेंं प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य है। भारत देश के प्रायः सभी राज्यों मेंं ऐसी शिक्षा नीति लागू है, परन्तु झाड़खंड राज्य क्यों नहीं है? 7, संविधान के अनुच्छेद- 371 के तहत महाराष्ट्र और गुजरात, 371 (क) मेंं नागालैंड, 371 (ख) मेंं असम, 371 (ग) मेंं मणिपुर, 371(घ) मेंं आंध्रप्रदेश, 371(च) मेंं सिक्किम, 371 (छ) मेंं मिजोरम, 371 (ज) मेंं अरूणाचल राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है, परन्तु झारखंड राज्य को क्यों नहींं दिया गया? केन्द्र की मोदी सरकार जबाव दे। 8, संविधान के अनुच्छेद- 16 (3) के मातहत शक्ति का प्रयोग करते हुए, अनुच्छेद- 371 (डी) के तहत आन्ध्रप्रदेश के लिए विशेष प्रावधान किया गया है, जहाँ स्थानीय व्यक्तियों को शत-प्रतिशत राज्य के सभी स्तर के कैडरों को नियुक्तियों मेंं अनिवार्य रूप से प्राथमिकता दी जायेगी, परन्तु झारखंड राज्य मे ऐसा नीति और नीयत भाजपा, कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा मेंं क्यों नहींं है ?

9, 2003 मेंं संविधान की 8वीं अनुसूची मेंं संताली भाषा को मान्यता दी गई। इसे विडंबना या दुखद आश्चर्य कहा जाए कि 17 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक  संविधान और मातृभाषा का महत्व क्यों नही समझा गया?10, 2012 मेंं “झारखंड आन्दोलनकारी चिन्हितकरण आयोग” गठित  हुआ, भाजपा, झमुमो और आजसू पार्टी के नेतागण बारी-बारी से इसके सदस्य बने। 2012 से 2019 तक करीब 70 हजार झारखंड आन्दोलनकारियों ने आवेदन किया है। खबर है कि अभी केवल 20 हजार आवेदनों की जांच हुई है, उनमें से सिर्फ 4 हजार आन्दोलनकारियों को ही चिन्हितकरण कर पेंशन की सुविधा मुहैया करायी गयी है, बाकी के 50 हजार झारखंड आन्दोलनकारियों का क्या होगा?

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