मुख्यमंत्री पद के छह घोषित उम्मीदवार

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बिहार विधान सभा के चुनाव में मुख्यमंत्री पद के छह घोषित उम्मीदवार हैं. एनडीए ने फिर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया है वहीं महागठबंधन के घोषित उम्मीदवार तेजस्वी यादव हैं. ग्रांड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट ने रालोसपा नेता उपेन्द्र कुशवाहा को तो पीडीए ने जाप नेता पप्पू यादव को सीएम उम्मीदवार घोषित किया है. प्लुरल पार्टी से पुष्पम प्रिया चौधरी स्वघोषित सीएम उम्मीदवार हैं.

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने खुद को सीएम उम्मीदवार नहीं बनाया है लेकिन उनके समर्थक चिराग को भावी सीएम के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं.मुख्य लड़ाई में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव आमने-सामने हैं. लेकिन प्रेक्षकों का मानना है कि एनडीए और महागठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और जोड़-तोड़ की जरूरत पड़ी तो कोई सातवें उम्मीदवार की इंट्री हो सकती हैंउम्मीदवारों में सबसे मजबूत दावेदार वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं.

2005 अक्तूबर चुनाव में एनडीए ने नीतीश के चेहरा को सामने किया और बहुमत की सरकार बनी.2010 चुनाव में भी नीतीश के चेहरे पर एनडीए को दो तिहाई बहुमत मिला. 2015 चुनाव के पूर्व नीतीश कुमार एनडीए छोड़ महागठबंधन में शामिल हुए और महागठबंधन ने उन्हें सीएम उम्मीदवार बनाया.महागठबंधन की सरकार बनी लेकिन राजद से मतभेद होने पर नीतीश कुमार फिर वापस एनडीए में आ गए. 2019 का लोकसभा चुनाव में भाजपा-जदयू को 40 में 39 सीटों पर जीत मिली.

मुख्यमंत्री बनने से पहले नीतीश कुमार केन्द्र में रेल,कृषि,भूतल परिवहन मंत्री रहे.इंजिनियर नीतीश कुमार पिछड़ी जाति से आते हैं और कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में लोकदल से संसदीय राजनीति की शुरूआत कीदूसरे प्रमुख दावेदार तेजस्वी यादव राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के छोटे पुत्र हैं.पिछले विधान सभा चुनाव (2015) में पहली बार विधायक बने और नीतीश मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री बनाए गए. नीतीश कुमार द्वारा महागठबंधन छोड़ने के बाद वे विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता बने.

उपमुख्यमंत्री और विरोधी दल नेता पद पर होने के कारण राजद की ओर से वे मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार बने जिसे महागठबंधन में शामिल कांग्रेस व वामदलों द्वारा स्वीकार किया गया है.शैक्षणिक योग्यता व अनुभव के मामले में तेजस्वी यादव नीतीश कुमार के सामने बौने हैं लेकिन लालू प्रसाद के जनाधार के बलबूते व पुत्र होने के नाते वे मुख्यमंत्री पद के दूसरे मजबूत दावेदार हैं.तीसरे दावेदार हैं रालोसपा सुप्रीमों उपेन्द्र कुशवाहा.पहले जदयू में थे और नीतीश कुमार की कृपा से प्रतिपक्ष के नेता भी बने. बाद में नीतीश कुमार से मतभेद होने पर जदयू से निकल कर अपनी पार्टी रालोसपा बना ली.

2014 में एनडीए में शामिल हुए और केन्द्र में मानव संसाधन राज्य मंत्री बनाए गए.2019 लोकसभा चुनाव के पूर्व एनडीए छोड़ महागठबंधन में आ गए. कुशवाहा की सीएम बनने की महत्वाकांक्षा ने उन्हे राजद से दूर कर दिया.इस चुनाव में ग्रांड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट ने उन्हें सीएम उम्मीदवार बनाया है. जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव को एक अन्य गठबंधन पीडीए ने मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया है.इनके अलावा पहली बार चुनाव मैदान में उतरी नई पार्टी प्लुरल्स ने पुष्पम प्रिया चौधरी को सीएम उम्मीदवार बनाया है.

छठे दावेदार लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान हैं.हालांकि चिराग ने भाजपा-लोजपा की सरकार बनने और भाजपा का सीएम बनने का दावा किया है.लेकिन उनके समर्थक चिराग को भावी सीएम के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे है. बिहार के चुनावी दंगल में पहली बार मुख्यमंत्री के छह-छह दावेदार हैं.पहली बार ही चुनावी समीकरण उलझ गया है.लोजपा के एनडीए से अलग चुनाव लड़ने के निर्णय से किसी गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने के अनुमान लगाए जा रहे हैं. अगर ऐसा हुआ और लोजपा,रालोसपा,छोटे दल व निर्दलीय के सहयोग की जरूरत पड़ी तो सातवां दावेदार भी सामने आ सकता है.अघोषित सातवां दावेदार कौन होगा इस पर तरह –तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

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