बिहार के मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह को उनका हक विलंब से मिला

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कवि कुमार

अमरेंद्र प्रताप सिंह यह नाम है सिद्धांत की राजनीति करने वाले व्यक्ति का। घमंड से दूर, मृदुभाषी तथा देख कर ही लोगों की प्रवृत्ति पहचान जाने का गुण उनमें शुरू से हैं। अमरेंद्र प्रताप सिंह बिहार राज्य के आरा से कई बार विधायक रह चुके हैं परंतु जमशेदपुर के लोग उन्हें जमशेदपुर का ही मानते हैं। क्योंकि अपने जीवन के बहुत लंबे समय तक उन्होंने जमशेदपुर में राजनीति की।

उनके बड़े भाई मृगेंद्र प्रताप सिंह (अब स्वर्गीय) झारखंड राज्य के पहले वित्त मंत्री रहे। मृगेेंंद्र प्रताप सिंह उग्र स्वभाव के थे परंतु उनके विपरीत अमरेंद्र प्रताप सिंह बहुत ही नम्र स्वभाव के थे। बात 80 के दशक की है। अंग्रेजी के एक पत्रकार के साथ भारतीय जनता पार्टी के किसी उदंड नेता ने अभद्रता कर दी। उस वक्त जमशेदपुर महानगर के भाजपा अध्यक्ष अमरेंद्र प्रताप सिंह थे। मैं उस पत्रकार को लेकर उनके पास पहुंचा।पत्रकार अपने साथ दुर्व्यवहार की चर्चा करते हुए भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू आ गया। मैंने गौर किया अमरेंद्र प्रताप सिंह की आंखें भी नम हो गईंं।

उन्होंने उदंड कार्यकर्ता की ऐसी खबर ली कि वह जीवन भर याद रखे। इस घटना ने बताया कि अमरेंद्र प्रताप सिंह काफी भावुक राजनीतिक हैं। एक भावुक राजनीतिक होना इसलिए भी जरूरी है कि वह अपने इलाके की जनता की भावना को भली-भांति समझ सके। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2020 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अमरेंद्र प्रताप सिंह को कृषि मंत्री बनाया। जबकि उन्हें बहुत पहले ही मंत्री का पद दिया जाना चाहिए था।

पर भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी महाभारत के कारण अमरेंद्र प्रताप सिंह अपने जायज है सालों वंचित रहें बताते हैं कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील मोदी अमरेंद्र प्रताप सिंह से नाराज रहते थे उनके तिकड़म के कारण ही नीतीश कुमार मजबूरन अमरेंद्र प्रताप सिंह को मंत्री पद नहीं दे पाए जबकि नीतीश कुमार जानते थे अमरेंद्र प्रताप सिंह को मंत्री बनाने पर बिहार की जनता का भला होगा

2020 के विधानसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सुशील मोदी को किनारे कर दिया जिसके कारण अमरेंद्र प्रताप सिंह को उनका हक मंत्री पद मिला इससे बिहार के साथ-साथ झारखंड भी गौरवान्वित हुआ है अमरेंद्र प्रताप सिंह मंत्री बनने के बाद अनेक ऐसे कदम उठाएंगे जिससे एक नई मिसाल कायम होगी ऐसा जमशेदपुर के लोगों का मानना है

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