इस बार बंगाल से ममता सरकार का जनाज़ा निकलना तय

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रविंद्र नाथ चौबे
जमशेदपुर, 23 दिसंबर : बंगाल में व्यापक बदलाव की लहरें हिलोरें ले रहीं हैं। इस बार लोकतांत्रिक तरीके से  बंगाल से ममता सरकार का जाना तय है। लेकिन इस बदलाव के पीछे बहुत बड़ी कुर्बानी है।

 पिछले एक दशक से ज्यादा समय से हिंदू संगठनों और बाद में भाजपा के नेताओं-कार्यकर्ताओं के बलिदान और पूरे देश में हिन्दुत्व और भारतीयता के जागरण के कारण नयी दिल्ली में आई‌ मोदी सरकार है। बंगाल के समाज और राजनीति में हिंसा और गुण्डागर्दी, गरीबी और बंगाली संस्कृति वाली सादगी सर्वाधिक मजबूत तत्त्व है। इसलिए सत्ता परिवर्तन में यही बड़े कारक हैं।

मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने गांधीवादी और लोकतांत्रिक तरीके से ममता बनर्जी सरकार की शुद्ध गुण्डागर्दी के खिलाफ केन्द्रीय सत्ता में रहते हुए भी अपमान और कार्यकर्ताओं की शहादत को झेलते हुए आंदोलन को जारी रखा। इससे आज बंगाल की राजनितिक हवा बदल गई है। इसके लिए मोदी जी को शांति का नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए।

इसके साथ ही भारत के गांधीवादियों , समाजवादियों, साम्यवादियों तथा यूरोप के नकलची बुद्धिजीवियों के जेहन में यह उतर जाना चाहिए कि हिन्दू और भारतीयता में ही व्यापक रूप में लोकतंत्र और अहिंसा न सिर्फ जीवन शैली वरन् सिद्धांत रूप में भी शाश्वत रहेंगे। इतना ही नहीं मोदी योगी और आरएसएस की संस्कृति अब भारतीय राजनीति की दलगत राजनीति में इतनी शक्तिशाली बनती जा रही है कि देर सबेर परिवारवाद की राजनीति करने वाले परास्त होकर रहेंगे, चाहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी होंं, ममता बनर्जी होंं उद्धव ठाकरे होंं प्रकाश सिंह बादल होंं तेजस्वी होंं, सब अगले दशक में खत्म होंगे।

2024 और 2029 आते आते हिन्दुत्व आधारित राजनीति के 500 सौ से ऊपर सांसद होंगे। भारत को दुनिया का नंबर एक शक्तिशाली देश बनाने के लिए हिंदू राष्ट्र बनाना जरूरी हो जायेगा।

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