तो पहले ही गिरफ्तार हो गया होता आतंकवादी दाऊद इब्राहिम का दाहिना हाथ अब्दुल मजीद कुट्टी

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जमशेदपुर, 27 जनवरी : पाकिस्तान में रह रहे हैं भारत के आतंकवादी दाऊद इब्राहिम के दाहिने हाथ अब्दुल मजीद कुट्टी की गिरफ्तारी आज से 2 साल पहले हो जाती अगर मानगो पुलिस ने गंभीरता से मानगो सहारा सिटी के निवासियों की जांच की होती।

जबकि पूर्व सिटी एसपी प्रभात कुमार ने सहारा सिटी कमेटी से यहां रहने वाले सभी लोगों के विस्तृत जानकारी की मांग की थी। उन्होंने मानगो थाना को जांच की जिम्मेदारी दी थी। अगर मानगो पुलिस ने सूची के जांच गंभीरता से की होती तो आतंकवादी अब्दुल मजीद कुट्टी पहले ही गिरफ्तार हो गया होता। 

गुजरात के एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड की टीम ने 25 दिसंबर 2020 को उसकी गिरफ्तारी मानगो स्थित बारी मस्जिद के पास से की। वह अपनी कार से रोज की तरह मस्जिद आया था। वहां पहले से तैनात गुजरात एटीएस के अधिकारी और मानगो के थाना प्रभारी ने उसे धर दबोचा तथा उसकी कार जप्त कर ली। 26 दिसंबर को एटीएस उसे गुजरात ले गई।

गुजरात पुलिस के मुताबिक मूल रूप से केरल का निवासी अब्दुल मजीद कुट्टी 24 सालों से फरार था। उसके खिलाफ गुजरात के मेहसाणा थाने में प्राथमिकी दर्ज थी। 1996 में मुंबई बम विस्फोट कांड में दाऊद इब्राहिम को आरडीएक्स तथा हथियार की सप्लाई कुट्टी नहीं की थी। इसके बाद पुलिस इसके पीछे पड़ी तो 106 पिस्तौलें, 800 जिंदा गोलियां और 4 किलो आरडीएक्स रखने के मामले में कई लोगों पर प्राथमिकी दायर की गई।

इस कांड में अब्दुल मजीद कुट्टी भी अभियुक्त बनाया गया। इसे छोड़ कर इस कांड के सभी अभियुक्तों को सालों पहले गिरफ्तार कर लिया गया था परंतु अब्दुल मजीद कुट्टी अपना नाम मोहम्मद कमाल रखकर जमशेदपुर में रह रहा था। गिरफ्तारी के वक्त वह सहारा सिटी मानगो के डुप्लेक्स में अपने परिवार के साथ रहता था। 

इस दौरान जाली पासपोर्ट बनाकर उसने बैंकॉक, दुबई और मलेशिया का दौरा भी किया। करीब 2 साल पहले जमशेदपुर के सिटी एसपी प्रभात कुमार ने सहारा सिटी में रहने वाले सभी परिवारों का ब्यौरा सहारा सिटी समिति से मांगा था। मानगो थाना ने इस सूची की जांच की थी। परंतु इस जांच के बाद भी अब्दुल मजीद कुट्टी को पुलिस नहीं पकड़ पाई।

संभवत मानगो थाना ने जांच के नाम पर खानापूरी की। इसके बाद भी मानगो सहारा सिटी में जितने किराएदार आते हैं, उनके विस्तृत सूची मानगो थाना को कमेटी द्वारा दी जाती है।चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस फरार आतंकवादी के झारखंड में रहने की जानकारी न झारखंड पुलिस को हुई न झारखंड के खुफिया तंत्र को।

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