फिर देश बचेगा कैसे?

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सुरेंद्र किशोर
दृश्य-1    

मुख्यतः आढ़तियों और मंडियों के बिचैलियों के भले के लिए कुछ लोगों ने दिल्ली को कई हफ्ते से बंधक बना रखा है। केंद्र सरकार के तीन नए कानूनों से देश के आम किसानों का बड़ा भला होने वाला है। दूसरी ओर, किसान के नाम पर आंदोलनरत लोगों को इन तीन कानूनों से आर्थिक नुकसान होने वाला है। क्या इस देश में आम लोगों के हित में कानून बनाना और उसे लागू करना किसी चुनी हुई सरकार के लिए भी अब असंभव हो गया है? ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट पहल क्यों नहीं कर रहा है?    

दृश्य-2    

इस साल के आरंभ में सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के विरोध में देश तोड़कों ने दिल्ली को बंधक बना रखा था। भारी हिंसा हुई। जबकि सी.ए.ए. और एन.आर.सी. से यहां के आम मुसलमानों की स्थिति पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। हां, घुसपैठ करके यहां आए बंगला देशी और रोहिग्यां मुसलमानों के नाम यहां की मतदाता सूची से जरूर बाहर होंगे।

दूसरी ओर, गैर मुस्लिम शरणार्थियों के नाम मतदाता सूची में जुड़ेंगे। एक अनुमान के अनुसार इन कानूनों से 2 करोड़ नए मतदाता जुड़ेंगे। करीब 5 करोड़ मतदाताओं के नाम कटेंगे। सी.ए.ए. और एन.आर.सी. से उन जेहादियों व देश तोड़कों को जरूर झटका लगेगा जो इस देश में धीरे-धीरे मुस्लिम आबादी बढ़ाकर यहां इस्लाम का शासन कायम करना चाहते हैं। वे जेहादी अपने उद्देश्य को सार्वजनिक रूप से घोषित भी करते रहते हैं। (देखें टाइम्स आफ इंडिया- 30 सितंबर 2001) 

यहां के कई दलों के नेताओं के खिलाफ अरबों रुपए के घोटाले के मुकदमे चल रहे हैं। वे घोटालेबाज इन देशतोड़कों के साथ मजबूती से खड़े हैं। वे चाहते हैं कि किसी भी तरह मोदी सरकार को गिरा दिया जाए ताकि उनकी अपार संपत्ति पर आया कानूनी संकट टल जाए।हालांकि यह होने वाला नहीं है। क्योंकि अधिकतर जनता मोदी के साथ है। मोदी का समर्थन बढ़ भी रहा है।  क्या उन जेहादियों के खिलाफ केंद्र सरकार को भी वैसी कड़ी कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है जैसी कार्रवाई अपने यहां के जेहादियों के खिलाफ चीन सरकार इन दिनों कर रही है?

निष्कर्ष या नतीजा    यदि इस तरह मुट्ठी भर लोग बारी-बारी से देश को बंधक बनाते रहे और केंद्र सरकार फिर भी मूकदर्शक बनी रहे तो अन्य अराजक तत्वों का हौसला नहीं बढ़ेगा? इस देश बचेगा कैसे?

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