सच तो ये है : बड़ी दुर्लभ अखबार की कटिंग हाथ लगी

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आनंद विजय सिंह 

अप्रैल 2008 में पंजाब और हरियाणा के किसानों ने और भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने तत्कालीन यूपीए सरकार के विरुद्ध आंदोलन कर मांग की थी कि केंद्र सरकार ने प्राइवेट कंपनियों के गेहूँ खरीदने पर जो प्रतिबंध लगाया है उसे उठाया जाए और प्राइवेट कंपनियों को उनकी फसल खरीदने की इजाज़त दी जाए, क्योंकि प्राइवेट कंपनियां उनकी फसल के दाम सरकारी दाम MSP से ज़्यादा दे रही हैं।  

हैरानी वाली बात है कि अब जब मोदी ने उनकी मांग मान ली है, तो वही किसान अपनी मांग से उलट गए हैं और मांग कर रहे हैं कि केन्द्र सरकार उनकी फसल MSP पर खरीदे और प्राइवेट कंपनियों को फसल खरीदने का फैसला रद्द करे। यह इस बात को शंका देता है कि यह आंदोलन किसान चला रहे हैं या किसान को मोहरा बना कर मोदी विरोधी तथा जनता द्वारा नकारी गयी पार्टियां।

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