सरकारी कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षित युवतियों का दूसरे राज्यों में शोषण

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जमशेदपुर, 12 दिसंबर : एक तरफ सरकार दीनदयाल कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षित युवक-युवतियों को बढ़िया नौकरी मिलने का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर कौशल विकास केंद्र के कैंपस सलेक्शन में नौकरी पाए हुए युवक-युवतियों की दूसरे राज्यों में बुरी दशा हो रही है। इसका पता आज तड़के 4 बजे तब चला जब कोयंबटूर की टेक्सटाइल मिल में काम करने गईंं 15 युवतियां शोषण का शिकार होकर जमशेदपुर वापस लौटीं। 

इस संबंध में झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी संजय लकड़ा ने बताया कि दीन दयाल कौशल विकास योजना मानगो के तहत तीन माह की ट्रेनिंग देकर युवतियों को तमिलनाड के कोयंबटूर के स्विफ्ट  टेक्सटाइल सेंटर में नौकरी के लिए भेजा गया था। जहाँ उन्हें प्रत्येक दिन 10 घंटा कार्य करना पड़ता था। छुट्टी के दिन भी उनको चारदीवारी के बाहर जाने की मनाही थी।

खाना भी अच्छा नहीं मिलता था। उनसे तमिल भाषा में जोर से चिल्ला कर बोला जाता था। ओवरटाइम दो घंटे का मात्रा 60 रुपया दिया जाता था। इस तरह युवतियों को बंधुआ मज़दूर के समान रखा गया था। इसकी जानकारी उनके अभिभावकों द्वारा चेन्नई  के निवासी फादर जोसफ सुरीन को दी गई।

फादर के प्रयास में तमिलनाड के डीएम, कलेक्टर एवं एनजीओ ने टेक्सटाइल मिल में छापामारी कर युवतियों को आज़ाद किया। रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत उन्हें बस में बैठा कर जमशेदपुर भेजा। संजय ने बताया कि युवतियों को प्रति माह 7 से 8 हजार रुपए वेतन देने की बात कह कर ले जाया गया था, परंतु उन्हें प्रतिमाह साढे ₹6000 वेतन दिया जाता था।

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