जमीन माफिया, राशन माफिया, घूसखोर थानेदार के खिलाफ आवाज उठाई तो जिला बदर करा दिया

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जमशेदपुर, 29 जनवरी : बागबेड़ा थाना इलाका कई कुख्यात अपराधियों से भरा पड़ा है परंतु बागबेड़ा पुलिस ने कीताडीह पश्चिम के पंचायत समिति सदस्य जितेंद्र यादव को सबसे कुख्यात अपराधी मानते हुए उन्हें जिला बदर करा दिया। 1 साल के लिए वे पूर्वी सिंहभूम जिले में नहीं घुस पाएंगे।

उन्हें पंचायत प्रतिनिधि बनाने वाली जनता अपनी समस्या उनको नहीं बता पाएगी। पुलिस ने जनता से एक जनप्रतिनिधि को छीन कर जनता के अधिकारियों का हनन किया, जो अपने आप में नैतिक अपराध है। एक तरह से जिला पुलिस ने जिला उपायुक्त सह दंडाधिकारी को भी गुमराह किया।

जिला से निकाले गए जितेंद्र यादव के कसूर पर नजर डालें और प्रशासन और पुलिस के पदाधिकारियों को लिखे गए उनके पत्रों का अध्ययन करें तो साफ पता चलता है जितेंद्र यादव को इसलिए जिला से निकाला गया कि उन्होंने भ्रष्टाचारी पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी।

इसके साथ ही जितेंद्र यादव जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय के भ्रष्टाचार को जोरदार तरीके से उजागर करते रहते थे। सरकारी निर्माण कार्यों में घपले बाजी के बारे में जितेंद्र यादव 2017 से जमशेदपुर के उच्चाधिकारियों और रांची के बड़े अधिकारियों को पत्र लिखते रहते हैं, जिससे घोटालेबाज और घूसखोर सरकारी पदाधिकारी भी उनसे परेशान रहते थे।

जितेंद्र यादव को बागबेड़ा के तत्कालीन थाना प्रभारी जितेंद्र ठाकुर ने बिना कारण कई दिन थाने में बंद कर रखा था। उन पर आरोप लगाया कि वे बाहर से अपराध कर्मियों को बुलाकर जमशेदपुर में रखे हुए हैं तथा किसी की हत्या कराना चाहते हैं। इस दौरान बागबेड़ा थाना में उन्हें शारीरिक प्रताड़ना भी दी गई। उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलने के कारण तीसरे चौथे दिन जितेंद्र यादव को छोड़ दिया गया।

बागबेड़ा थाना के इस अत्याचार के खिलाफ जितेंद्र यादव ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा। आयोग में उनका मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद भी बदले की भावना से थाना प्रभारी ने कई अपराधिक मामलों में जितेंद्र यादव का नाम घुसा दिया। उनके खिलाफ साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अनुसंधान के दौरान जितेंद्र यादव का नाम डीएसपी ने निकाल दिया। इन सब बातों के सही तरीके से जांच किए बिना बागबेड़ा थाना ने जिला बदर करने वालों की सूची में जितेंद्र यादव का नाम डालकर जिला दंडाधिकारी के पास भेज दिया।

इस दौरान पुलिस के बड़े अधिकारियों से मिलकर जितेंद्र यादव ने अपनी बेगुनाही के कागजात उन्हें दिखाएं परंतु उनकी एक बात भी नहीं सुनी गई। अंततः महीने भर पहले जितेंद्र यादव को जिला बदर करने का आदेश दे दिया गया। इस संबंध में जितेंद्र यादव ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्वी सिंहभूम जिला के जिला दंडाधिकारी को पत्र दिया है।

उन्होंने पत्र में लिखा है कि बागबेड़ा के थानेदार, अपराधकर्मी, थाना के दलाल राजनेता, लड़की सप्लायर, जो रेलवे की जमीन और झारखंड सरकार की जमीन पर कब्जा कर अपना व्यापार चलाकर लाखों रुपए महीने कमा रहे हैं, राशन माफिया जो गरीबों का राशन लूट कर सरकार के साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं, बागबेड़ा के थाना प्रभारी जो असामाजिक तत्व और कुछ प्रेस वालों के साथ मिलकर प्लॉट काटकर आदिवासी एवं सरकारी जमीन की खरीद बिक्री कर रहे हैं।

ऐसे सभी लोगों के खिलाफ उन्होंने अभियान चलाया था। इसलिए सभी ने एकजुट होकर उनके खिलाफ षड्यंत्र कर उन्हें तड़ीपार करा दिया। जितेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से इस षड्यंत्र के जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। उन्होंने जिला दंडाधिकारी से भी पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है।

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