आज़द मज़दूर में छपी खबर का असर, झालसा के मेंबर सेक्रेटरी ने शुरू की गंभीर जांच, अस्पताल में गहमागहमी

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जमशेदपुर, 21 फरवरी : आज़ाद मज़दूर के 16 फरवरी के अंक में छपे समाचार ”91% जली आदिवासी महिला बेड के नीचे जमीन पर नग्न पड़ी मिली, 2 दिनों से नहीं चढ़ाया गया था सेलाइन” की जांच करने झालसा के मेंबर सेक्रेट्री मोहम्मद साकिर आज जमशेदपुर पहुंचे। मालूम हो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने उन्हें इस मामले की जांच कर 1 सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देने की निर्देश दिया है।

आज़ाद मज़दूर में प्रकाशित इस समाचार के कतरन के साथ महिला वकील अमृता कुमारी ने ई-मेल पर चीफ जस्टिस को इस मामले की जानकारी दी थी। चीफ जस्टिस ऑफ झारखंड हाई कोर्ट ने तत्काल मामले में स्वत: संज्ञान लिया। उन्होंने 17 फरवरी को फोन कर अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया की जली हुई महिला की उचित चिकित्सा की जाए। तब शाम 6:30 बजे के करीब उस महिला को इमरजेंसी वार्ड की जमीन से उठाकर बर्न वार्ड में अस्पताल प्रबंधन ने भेजा। 18 फरवरी को झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले को प्रथम रिट के रूप में सुना।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने जली हुई महिला के इलाज में एमजीएमसीएच अस्पताल प्रबंधन द्वारा लापरवाही बरतने के कारण  सरकारी वकील को कड़ी फटकार लगाई तथा पूरे मामले की जांच झालसा के मेंबर सेक्रेटरी को सौंप दी।आज झालसा के मेंबर सेक्रेट्री रांची से जमशेदपुर आए तथा सर्किट हाउस में उन्होंने आज़ाद मज़दूर समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ कवि कुमार का बयान दर्ज किया। कवि कुमार ने उन्हें बताया कि 16 तारीख को जब वे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में गए तो 91% जली हुई महिला को बेड के नीचे गिरा हुआ पाया। उसके शरीर में एक भी वस्त्र नहीं था। वह गंदी जमीन पर पड़ी हुई थी। जिससे उसे इन्फेक्शन का खतरा था।

उसे 2 दिनों से सेलाइन नहीं चढ़ाया गया था। तब कवि कुमार ने अस्पताल के उपाधीक्षक नकुल चौधरी को फोन कर महिला की दुर्दशा की जानकारी दी तथा वेनी सेक्शन कर महिला को सेलाइन चढ़ाने का अनुरोध किया। इसके बाद डॉक्टर नकुल चौधरी ने जली हुई महिला के पास एक डॉक्टर को भेजा। कवि कुमार ने मेंबर सेक्रेट्री को डॉ नकुल चौधरी से हुई बातचीत का ऑडियो क्लिपिंग भी दिया।

याचिकाकर्ता अमृता सिंह ने मेंबर सेक्रेट्री को अस्पताल उपाधीक्षक नकुल चौधरी से जली हुई महिला के संबंध में बातचीत का ऑडियो क्लिपिंग दिया और जली हुई महिला की दुर्दशा के बारे में अपना बयान कलमबद्ध कराया। अमृता कुमारी ने इस संबंध में कुछ कागजात भी मेंबर सेक्रेट्री को सौंपे। पूर्वी सिंहभूम जिला के उपायुक्त सूरज कुमार ने मेंबर सेक्रेट्री से कहा कि जैसे ही उन्होंने 16 फरवरी को आज़द मज़दूर अखबार में प्रकाशित खबर को पढ़ा उन्होंने फौरन एडीएम लॉ एंड ऑर्डर के नेतृत्व में एक जांच कमेटी बना दी।

करीब 2 बजे मेंबर सेक्रेट्री मामले की जांच करने महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने अस्पताल अधीक्षक डॉ संजय कुमार, उपाधीक्षक नकुल चौधरी, डॉ योगेश, डॉ ललित मिंज  तथा वार्ड की नर्स का बयान दर्ज किया। इसके बाद मेंबर सेक्रेट्री एमजीएमसीएच का बर्न वार्ड देखने गए। सूत्रों के मुताबिक वहां उन्हें बदबू और गंदगी देखने को मिली।

करीब 4:30 बजे तक झालसा के मेंबर सेक्रेट्री एमजीएमसीएच अस्पताल में रहे और जांच करते रहे।विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान मेंबर सेक्रेट्री को दिए गए बयानों से यह साबित होता है कि जली हुई महिला हीरामणि बरला के इलाज में लापरवाही बरती गई। अस्पताल अधीक्षक संजय कुमार ने यह स्वीकार किया कि हाई कोर्ट से उन्हें 17 फरवरी को फोन आया।

तब उन्होंने महिला को बर्न वार्ड में भेजा। जब 16 अप्रैल को दोपहर 1 बजे के करीब आज़ाद मज़दूर के ब्यूरो चीफ कवि कुमार ने उपाधीक्षक नकुल चौधरी को फोन किया तब नकुल चौधरी ने महिला का वेनी सेक्शन करा कर उसे सेलाइन कड़वाया। जबकि महिला 2 दिन पहले अस्पताल में दाखिल हुई थी।इन बातों से साबित हुआ कि अस्पताल में जब तक ऊपरी दबाव नहीं पड़ता, यहां गरीब एवं असहाय रोगियों का इलाज नहीं होता। 


सवाल यह उठता है कि क्या  आज़ाद मज़दूर के पत्रकार, याचिकाकर्ता वकील तथा झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन कॉल आने पर ही रोगी का सही इलाज होगा?

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