आज एमजीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड में दिखाई दिया 40 साल पुराना नजारा, 91% जली आदिवासी महिला बेड के नीचे जमीन पर नग्न पड़ी मिली, 2 दिनों से नहीं चढ़ाया गया सेलाइन

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कवि कुमार
जमशेदपुर, 16 फरवरी : आज महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में 40 साल पुराना शर्मनाक नजारा देखने को मिला। पुराने नजारे और आज के नजारे में फर्क इतना था कि आज रोगी महिला बेड के नीचे जिस जमीन पर पड़ी हुई थी, उस जमीन पर कीमती टाइल्स लगी हुई है तथा बेड भी जर्जर नहीं बल्कि कीमती, अत्याधुनिक और नया है। 

इन 40 सालों में महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सरकार के सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च हुए। पर 40 साल पुरानी कुव्यवस्था आज भी जारी रहने के चलते यह नजारा देखने को मिला। जिसे आप भी इस समाचार के साथ छापे जा रहे फोटो के जरिए देख सकते हैं।

आज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बेड नंबर 18 में दाखिल चक्रधरपुर के बोरदा गांव की 30 साल की आदिवासी महिला हीरामणि बारला पूरी तरह नग्न थी। वह बेड के नीचे जमीन पर सोई हुई थी। उसके हाथ और पैरों में बांधी गई पट्टियां ढीली होकर लगभग खुल चुकी थीं। अस्पताल के लोगों ने बताया कि महिला जमीन पर न गिर जाए इसलिए उसे जमीन पर सुला दिया गया। पर उसकी उपेक्षा का यह सबूत था कि जमीन पर उसके लिए न गद्दा बिछाया गया था न चादर। इसके साथ ही न उसके शरीर की खुली हुई पट्टियां ठीक से बांधी गई थीं। 91% जली हुई महिला के शरीर में इंफेक्शन हो जाए इसकी पूरी व्यवस्था उसे नंगी जमीन पर सुलाकर अस्पताल के डॉक्टरों ने की थी। 

जानकारों के मुताबिक अस्पताल में ऐसे अनेक बेड हैं जिनके दोनों तरफ सपोर्ट लगाकर रोगी को बेड से गिरने से बचाया जा सकता है। हीरामणि बारला के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने वैसे बेड का इस्तेमाल नहीं किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2 दिन पहले 14 फरवरी को अस्पताल में दाखिल इस महिला को बर्न वार्ड में नहीं भेजा गया। जबकि नया बर्न वार्ड लाखों रुपए लगाकर कुछ साल पहले ही बनाया गया है। इस बर्न वार्ड के इंचार्ज डॉ ललित मिंज हैं।

इन्हें काबिल डॉक्टर माना जाता है पर इस घटना ने इनकी काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। ललित मिंज यह तर्क दे सकते हैं कि महिला को इमरजेंसी की जरूरत थी इसलिए उसे बर्न वार्ड में नहीं लाया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड में जली हुई महिला की दुर्दशा देखना भी उनका काम है। वह रोजाना उन्हें देखने इमरजेंसी वार्ड में आते भी हैं। यह आदिवासी महिला डॉक्टर योगेश की यूनिट में दाखिल है। 


यह जानकर आप चौंक जायेंगे कि इमरजेंसी में महिला को 2 दिन बाद भी सेलाइन नहीं चढ़ाया गया। कारण बताया गया कि ज्यादा जल जाने के कारण उसकी नस नहीं खोजी जा सकी, जहां सुई लगाकर उसे सेलाइन चढ़ाया जाए। यह बात साधारण आदमी भी जानता है कि जब सेलाइन चढ़ाने के लिए मरीज की नस न मिले तब वेनी सेक्शन के माध्यम से मरीज को सेलाइन चढ़ाया जाता है।

यहां 2 दिनों से डॉक्टरों ने महिला रोगी की उपेक्षा के कारण वेनी सेक्शन नहीं किया। जब इस पत्रकार ने अस्पताल के उपाधीक्षक नकुल चौधरी को फोन किया तब उन्होंने फौरन एक विशेष डॉक्टर को भेज कर महिला की खोज खबर ली।मालूम हो इस महिला के शरीर पर मिट्टी तेल डालकर उसके पति राजन पूर्ति ने 14 फरवरी को आग लगा दी थी। उसे एक व्यक्ति अस्पताल में छोड़कर भाग गया। नतीजतन अस्पताल के डॉक्टरों ने इसकी सूचना साकची थाना को दी आज साकची थाना से महिला एएसआई टेरेसा उसका बयान लेने आईं।

महिला प्यास से तड़प रही थी। वह जो कुुछ बोल रही थी महिला पुलिस अधिकारी समझ नहीं पा रही थीं। इस पत्रकार ने वीडियो में महिला का बयान लिया था। जिसमें उसने अपने पति का नाम लेकर कहा था कि उसने मिट्टी तेल डालकर माचिस से आग लगाकर उसे जलाया। महिला पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर आजाद न्यूज़ में महिला का वीडियो रिकॉर्डिंग उन्हें दे दिया। यह वीडियो रिकॉर्डिंग कोर्ट में अपराधी को सजा दिलाने के काम आएगा। 

हमारे संवाददाता ने चाईबासा मुफस्सिल के एसडीपीओ अमर पांडेय को फोन से पूरी बात बताई।उनके इलाके की घटना नहीं होने के बाद भी उन्होंने तत्काल चक्रधरपुर पुलिस को खबर कर महिला के मायके वालों को अस्पताल भेजने का इंतजाम किया। महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल कि इस कुव्यवस्था का कारण जमशेदपुर के मूल निवासी झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को अस्पताल प्रबंधन से पूछना चाहिए। क्योंकि इस शर्मनाक घटना के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार व्यक्ति वही हैं। अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस आदिवासी महिला की दुर्दशा के बारे में पूछेंगे तो स्वास्थ्य मंत्री से ही पूछेंगे।
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