नाली में गिर कर किसान के बैल मरने का मामला, मानगो नगर निगम ने जबरदस्ती बैल की लाश उठाई, बैल के मालिक ने पोकलेन को कब्जे में लिया

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जमशेदपुर, 25 फरवरी : नेशनल हाईवे 33 पर स्थित बालिगुमा गांव में आदिवासी किसान अनिल हंसदा का बैल नगर निगम द्वारा बनाई गई बेढ़ंगी नाली में गिर गया। इस जगह इस नाली की गहराई 5 फुट तथा चौड़ाई डेढ़ फुट बताई जाती हैै। इसके कारण बैल नाली में बुरी तरह फंस गया। उसे जीते जी निकालना संभव नहीं था।

रस्सी के सहारे अनिल ने ग्रामीणों के साथ मिलकर बैल को बाहर निकाला तो बैल अंतिम सांसें गिन रहा था। यह घटना 23 फरवरी की है। नाली के बगल गांव की मुख्य सड़क पर बैल के मर जाने के बाद भी 3 दिनों तक अनिल ने बैल की लाश नहीं उठाने दी। उसकी मांग थी कि मानगो नगर निगम या बेढ़ंगी नाली बनाने वाले ठेकेदार उसके बैल का मुआवजा दें तब बैल की लाश सड़क से उठाई जाए।

बेढ़ंगी नाली

सूत्रों के मुताबिक अनिल बैल की लाश के साथ सड़क पर बैठ गए। आज दोपहर अनिल हंसदा किसी काम से थोड़ी देर के लिए गांव से बाहर गए। इसी बीच मानगो नगर निगम नेेपोकलेनन भेज कर उसके बैल को सड़क से उठाया और जंगल में ले जाकर गाड़ दिया। अनिल हंसदा मौके पर पहुंचे और गांव से बाहर निकलते पोकलेन को रोक दिया। परंतु कुछ देर बाद सड़क जाम होने पर उस संवेदनशील किसान ने पोकलेन को जाने दिया। आज आज़ाद न्यूज़ से अनिल हांसदा ने कहा कि उसने ₹80000 में दो बैल खरीदा था।

जिसमें से एक बैल नाली में गिर कर मर गया। अब वह खेती कैसे करेगा। उसके भूखे मरने की नौबत आ गई है। नगर निगम या सरकार द्वारा बैल की मौत का मुआवजा उसे दिया जाना चाहिए वरना वह परिवार सहित आमरण अनशन पर बैठ जाएगा। अनिल हांसदा तथा आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि इस नाली की मांग गांव की तरफ से नहीं की गई थी। जबरदस्ती गांव में मानगो नगर निगम ने नाली बना दी।

जबकि इस नाली की जरूरत नहीं थी। नाली बनने के बाद गांव में गंदगीी, बदबू, मच्छर और परेशानी बढ़ गई। यह नाली किसी किसी जगह 5 फुट गहरी है तो किसी जगह 3 फुट गहरी। नाली किसी जगह 2 फुट चौड़ी है तो किसी जगह 3 फुट चौड़ी। नाली बनाने वाले ठेकेदार ने उल्टी ढलान कर दी है। जहां पानी जाना चाहिए वहां से पानी वापस आता है नतीजा यह है कि नाली हमेशा सड़े हुए पानी से भरी रहती है। जहां मच्छर के लारवा पनपते हैं, और बालिगुमा बस्ती में नाली के कारण मच्छरों की भरमार हो गई है।

पड़ोसी महिला ने बताया कि कई बार बच्चे भी खेलते हुए नाली में गिर कर घायल हो गए। जिसे ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से निकाला। ग्रामीणों ने कहा कि इस नाली में खर्च किया गया लाखों रुपया बर्बाद हुआ। नाली ग्रामीणों के किसी काम नहीं आ रही है।

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