16 फरवरी से आरंभ होने वाले कुम्भ मेला में पहली बार किन्नर महामंडलेश्वर देवी हिमांगी सखी की उपस्थिति दर्ज होगी

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पशुपति अखाड़े की महामंडलेश्वर देवी हिमांगी सखी द्वारा प्रशासन को सारे सबूती आवश्यक कागजात दिए जाने के बाद यमुना किनारे 16 फरवरी से आरंभ होने वाले कुम्भ मेले के क्रम में संत समागम के लिए अपना शिविर लगाने की अनुमति प्रशासनिक स्तर पर दे दी गई है। पशुपति अखाड़े द्वारा आयोजित संत समागन का मुख्य आकर्षण महामंडलेश्वर देवी हिमांगी सखी द्वारा आगंतुक भक्तों को श्री मदभागवत कथा का रसपान कराना होगा।

साथ ही साथ देश भर के किन्नर साधक भी शिविर में मौजूद रहेंगे। पशुपति अखाड़ा को शिविर के लिए भूमि आबंटन किये जाने के पूर्व  निर्मोही आणि अखाड़े के द्वारा किन्नर अखाड़े पर आपत्ति जताई गई थी और यह दावा किया गया था कि किन्नर किसी भी सम्प्रदाय से जुड़े नहीं है। इसलिए उन्हें भूमि आबंटन नहीं किया जाना चाहिए। सारी विषम परिस्थितियों के बावज़ूद किन्नर अखाड़ा के रूप में चिन्हित पशुपति अखाड़ा को संत समागम के लिए प्रशासनिक स्तर पर भूमि आवंटित किया जाना किन्नर संतों के लिए एक विशिष्ट सफलता का परिचायक है।

यहाँ उल्लेखनीय है कि किन्नर देवी हिमांगी सखी पशुपति अखाड़ा (नेपाल) से महामंडलेश्वर हैं। पशुपति अखाड़ा अपने आप में एक स्वतंत्र अखाड़ा है। महामंडलेश्वर देवी हिमांगी सखी भारत वर्ष की पहली व एकमात्र किन्नर महामंडलेश्वर हैं, जो मंच से अपने प्रवचन के दौरान श्री मदभागवत कथा का पाठ करती हैं। भगवान श्री कृष्ण की प्रेम लीला स्थली वृंदावन में यमुना नदी के किनारे आयोजित होने वाले कुम्भ मेला में पहली बार किन्नर महामंडलेश्वर की उपस्थिति दर्ज होगी।

ज्ञातव्य है कि हरिद्वार कुम्भ से पहले वृंदावन में संत समागम के आयोजन की परंपरा चली आ रही है। संत समागम में पूरे विश्व से आने वाले साधु संत और श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ शामिल होते हैं। पूर्व के निर्धारित परंपराओं का निर्वाह करते हुए हरिद्वार कुम्भ से पूर्व वृंदावन में  किन्नर महामंडलेश्वर देवी हिमांगी सखी अपना शिविर लगाएगीं। पूर्व में सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों  के लिए गतिशील संस्था कनकधारा फाउंडेशन द्वारा देवी हिमांगी सखी को ‘कनक श्री’ अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

बकौल महामंडलेश्वर देवी हिमांगी सखी संसार के प्रत्येक प्राणी को मानव सेवा के प्रति समर्पित होना चहिए..मोक्ष प्राप्ति का सही मार्ग यही है। मानव से मानव को जोड़ कर रखने की दिशा में गतिशील इंसान को सदैव सफलता मिलती है प्रभु भी उनका साथ देते हैं। जाति धर्म व लिंग भेद की भावना से अलग हट कर मानव कल्याण की दिशा में इंसान को अग्रसर होना चाहिए तभी राष्ट्र का कल्याण संभव है। इसी सोच के तहत मैंने वैष्णव संतों से बात की है।

किन्नर संतों को वैष्णव संत बना कर उन्हें सनातन धर्म के प्रति शिक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें धार्मिक कार्यों से संबंधित जानकारियां दी जाएगी। उसकी पहली कड़ी में मैं कुम्भ मेले के अवसर पर पशुपति अखाड़े द्वारा आयोजित संत समागम शिविर में शामिल हो रही हूँ।
 संवाद प्रेषक : काली दास पाण्डेय

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