टाटा स्टील की असली सूरत दिखाई दुलाल भुइयां ने, कंपनी के अधिकारियों को कमीना कहा

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जमशेदपुर, 3 मार्च : जमशेदपुर में जेएन टाटा की 182वीं वर्षगांठ में पूरा जमशेदपुर झूम खुशी से झूम रहा है, ऐसा दिखाया जा रहा है। यह अलग बात है कि आज टाटा स्टील के स्थापना दिवस पर टाटा स्टील के सभी अधिकारी, टाटा वर्कर्स यूनियन के सभी पदाधिकारी, टाटा स्टील से चंदा पाने वाली सभी गैर सरकारी संस्थाओं के अधिकारी, टाटा स्टील के ठेकेदार, जमशेदपुर से निकलने वाले समाचार पत्र के मालिक, राजनीतिक दल के नेता तथा गैर स्वाभिमानी सरकारी पदाधिकारी खुशी से झूम रहे हैं।

पूरे जमशेदपुर को खुश और संतुष्ट दिखाने के लिए अखबारों ने आज के दिन बड़े-बड़े विशेषांक निकालें और प्रत्यक्ष परोक्ष रूप से टाटा स्टील का गुणगान किया। टाटा स्टील से पैसा पाने वाली एनजीओ के पदाधिकारियों ने टाटा स्टील की माला जपते हुए लेख लिखे, इंटरव्यू दिए और पूरी ताकत टाटा स्टील को सामाजिक दायित्व का निर्वाह करने वाली कंपनी साबित करने में झोंक दी।सब जानते हैं कि यह सब टाटा संस के  एमरिट्स चेयरमैन रतन टाटा और टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन को दिखाने के लिए किया गया। क्योंकि दोनों  2 दिनों से जमशेदपुर में हैंं। 

परंतु झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं विधायक दुलाल भुइयां ने इस टाटा स्टील की इस कोशिश पर पानी फेर दिया। उन्होंने टाटा स्टील के सामने आईना रख दिया, जिससे टाटा स्टील अपनी असली सूरत देख सके। दुलाल भुइयां ने जो किया उससे टाटा स्टील की मज़दूर विरोधी सूरत पूरे देश के सामने आई। दुलाल भुईयां संस्थापक दिवस के दौरान आज एक डेढ़ सौ मज़दूरों को लेकर साकची जुबली पार्क गेट के सामने उपवास पर बैठ गए। ये मज़दूर टाटा स्टील के टेंपरेरी मज़दूर हैं परंतु इनसे टाटा स्टील परमानेंट नेचर के काम कराता है।

दुलाल भुइयां ने कहा कि श्रम कानून के मुताबिक परमानेंट नेचर के काम करने वाले मज़दूरों को परमानेंट किया जाना चाहिए। परंतु सालों से टाटा स्टील इन्हें परमानेंट नहीं कर रहा है। पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां ने कहा कि इस आंदोलन के जरिए वे रतन टाटा को संदेश देना चाह रहे हैं कि वे मज़दूरों के शोषण को देखें और उनसे बात करें। दुलाल ने कहा कि उन्होंने टाटा स्टील के अफसरों के साथ ही मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री और डीएलसी ऑफिस को भी मज़दूरों की समस्याओं से अवगत कराया है। 

रतन टाटा ने जुबली पार्क का उद्घाटन किया है और जुबली पार्क के गेट पर टाटा स्टील के सफाई मज़दूर उपवास पर बैठे हैं। यह मज़दूर आदिवासी, गरीब, अत्यंत गरीब, दलित और अत्यंत दलित वर्ग के हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि जेएन टाटा के जन्मदिन पर मज़दूरों को खुश होना चाहिए परंतु आज यही मज़दूर उपवास कर रहे हैं, भूखे पेट बैठे हैं। मंत्री ने प्रश्न किया कि क्या इस तरह टाटा स्टील टाटा साहेब के नाम को रौशन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के 15-20 हजार मज़दूर टाटा स्टील को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि जमशेतजी नसरवानजी टाटा की सोच अच्छी थी। वे चाहते थे कि जमशेदपुर में बड़ा अस्पताल बने, मज़दूरों को सुविधाएं दी जाएं, साफ सफाई करने वाले मज़दूरों को नौकरी मिले पर टाटा स्टील में कुछ कमीने अफसर लोग हैं जो ऐसा नहीं होने देना चाहते हैं। उनके खिलाफ झारखंड मज़दूर यूनियन खड़ा है। 

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