सूर्य मंदिर में दो महाबलियों की लड़ाई शुरू, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन देख रहे तमाशा, पुलिस प्रशासन किंकर्तव्यविमूढ़

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कवि कुमार
जमशेदपुर, 6 मार्च : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और उन्हें विधानसभा चुनाव में हराने वाले झारखंड के पूर्व मंत्री सरयू राय ने फिलहाल सूर्य मंदिर में अपना शक्ति प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इससे पहले भी सूर्य मंदिर में सरयू राय ने अपने लोगों की नई सूर्य मंदिर कमेटी बनाकर रघुवर दास को छेड़ा था। इस तरह मौजूदा समय में दो सूर्य मंदिर कमेटियां काम कर रही हैं।

एक में रघुवर दास के समर्थक लोग हैं और दूसरे में सरयू राय के।यह दोनों कमेटियां सूर्य मंदिर के समारोह के बारे में अपने अपने निर्णय लेती हैं और दोनों निर्णय एक दूसरे के विरोधी होते हैं।यह सबको मालूम है कि रघुवर दास पिछले 25 सालों से अपने विधायक फंड और मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकारी विभागों के फंडों का इस्तेमाल सूर्य मंदिर में कर रहे हैं। जिसके चलते सूर्य मंदिर ने भव्य रूप धारण कर लिया है। इस तरह यह कहना गलत नहीं होगा कि रघुवर दास और उनके चट्टे बट्टे सूर्य मंदिर को अपनी संपत्ति समझ रहे हैं।

दूसरी तरफ जमशेदपुर पूर्व के विधायक सरयू राय का मानना है कि रघुवर दास ने मंदिर में जो भी विधायक फंड और सरकारी फंड लगाया उनका निजी नहीं बल्कि जनता का है। अब रघुवर दास विधायक नहीं हैंं तो उन्हें अपने कब्जे से सूर्य मंदिर को मुक्त कर देना चाहिए तथा इसे सरकार के सुपुर्द कर देना चाहिए। इस बारे में विधायक बनने के बाद सरयू राय ने अनेक काम भी किए। उन्होंने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति के जिम्मे सूर्य मंदिर का सोन मंडप तथा अन्य कमाऊ स्थल सौंप दिया।

इससे कमाए गए रुपए को जेएनएसी को वसूलने को कहा। इससे पहले जनता से वसूली जाने वाली भारी रकम को रघुवर दास द्वारा बनाई सूर्य मंदिर कमेटी के लोग अपने पास रखते थे।जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमिटी के अधिकारियों की हिम्मत नहीं होती थी कि वे रघुवर दास के लोगों से हिसाब किताब मांगेंं।5 मार्च को सरयू राय की सूर्य मंदिर कमेटी के लोग शिवरात्रि महोत्सव मनाने के बारे में विचार करने सूर्य मंदिर मेंं पहुंचे।

उन्हें पता चला कि किसी व्यक्ति के आदेश से सूर्य मंदिर के चिल्ड्रन पार्क को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है। यह काम 80% तक पूरा हो गया है। सरयू राय की सूर्य मंदिर कमेटी के वरीय उपाध्यक्ष संजीव आचार्य ने ठेकेदार से पूछा तो उनसे कहा गया कि सूर्य मंदिर कमेटी के अध्यक्ष संजीव सिंह के आदेश से ऐसा किया जा रहा है। श्री आचार्य ने जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमिटी के विशेष पदाधिकारी कृष्ण कुमार से पूछा तो उन्होंने चिल्ड्रन पार्क का स्थान बदलने जाने की जानकारी नहीं होने की बात कही।

उन्होंने इस संबंध में अपने स्तर से किसी तरह का आदेश नहीं देने की बात भी कही। संजीव आचार्य ने बताया कि तब उन्होंने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से चिल्ड्रन पार्क की जगह बदले जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने 5 मिनट के अंदर जानकारी प्राप्त कर सूचना देने की बात कही। परंतु उन्होंने कोई सूचना नहीं दी। संजीव आचार्य ने बताया कि चिल्ड्रन पार्क को दूसरी जगह ले जाए जाने से रोकने के लिए उन्होंने चिल्ड्रन पार्क के गेट में ताला लगा दिया।

उन्होंने बताया की पुरानी कमेटी के लोगों ने सिदगोड़ा थाने में जाकर उनके लोगों के ऊपर झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई कि मंदिर के गेट में ताला लगा दिया गया। प्राथमिकी में और झूठे आरोप भी लगाए गए। संजीव ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच की मांग की और कहा कि बिना प्रशासनिक आदेश के चिल्ड्रन पार्क को दूसरी जगह ले जाने वाले का पता लगाया जाए।सरयू राय के चट्टे बट्टे की इस कार्यवाही से चिल्ड्रन पार्क की जगह बदलने का काम रुक गया।

जिससे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास समर्थक सूर्य मंदिर कमेटी के पदाधिकारी और भारतीय जनता पार्टी के नेतागण क्रोधित हो गए। उन्होंने आज बिना अनुमति के कोरोना संकट में भारी भीड़ जमा की और सोशल डिस्टेंस और मास्क का पालन नहीं करते हुए पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त के कार्यालय में जुलूस लेकर पहुंचे। इनमें महिलाओं की भी काफी संख्या थी। झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण, महानगर भाजपा अध्यक्ष गुंजन यादव, सूर्य मंदिर कमेटी के अध्यक्ष संजीव सिंह वगैरह अनेक नेता इस जुलूस में शामिल थे।

संजीव सिंह ने मौजूदा विधायक के लोगों को गुंडा तत्व बताते हुए कहा कि कल दोपहर 1 बजे उन्होंने मंदिर में प्रवेश कर मंदिर के पुजारी, कर्मचारी और भक्तों के साथ गाली गलौच की तथा सूर्य मंदिर को बंद करा देने की धमकी दी। संजीव सिंह ने मौजूदा विधायक सरयू राय का नाम लिए बिना कहा कि इन गुंडों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है तथा ये लोग उनकी हत्या भी करा सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर दोबारा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ये गुंडे ऐसा करेंगे तो उन लोगों ने भी चूड़ी नहीं पहन रखी है।

इसका अर्थ यह हुआ की संजीव सिंह भी गुंडागर्दी का जवाब गुंडागर्दी से देंगे। उन्होंने मौजूदा विधायक सरयू राय का नाम लिए बिना उन्हें अधर्मी नेता कहा। उन्होंने रघुवर दास का नाम नहीं लेते हुए कहा कि सूर्य मंदिर के संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी देखरेख में सूर्य धाम को इतना बड़ा रूप दिया है कुछ नेताओं को यह पच नहींं रहा है वैसे अधर्मी नेताओं से उनका कहना है कि सूर्य मंदिर में जो कमेटी चल रही है वैसे ही चलेगी। इस संबंध में उन लोगों ने आज पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा है।

भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष गुंजन यादव ने विधायक सरयू राय का नाम लिए बिना चिल्ड्रन पार्क की जगह बदलने के मामले को धर्म और आस्था से जोड़ते हुए कहा कि ये नेता धर्म और आस्था विरोधी हैंं एवं भाजपा ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं करेगी। जब भी सूर्य मंदिर में कोई धार्मिक समारोह होता है तब शहर के असामाजिक तत्व व्यवधान डालते हैं।दूसरी ओर भारतीय जन मोर्चा के नेतागण तथा सरयू राय द्वारा बनाई गई सूर्य मंदिर कमेटी के वरीय उपाध्यक्ष संजीव आचार्य आज धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी के पास ज्ञापन देने गए।

उन्होंने कहा यह 25 सालों से दबंगई के सहारे सूर्य मंदिर कमेटी के लोग पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के संरक्षण में मंदिर का व्यवसायिक उपयोग कर रहे हैं। इन लोगों ने मनमाने ढंग से चिल्ड्रन पार्क की जगह बदल दी। इसके बारे में कल ही उन्होंने डीसी, सीनियर एसपी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर, एसडीओ तथा जेएनएसी के स्पेशल ऑफिसर को लिखित में शिकायत दी। उन्होंने इस बात की जांच करने को कहा कि चिल्ड्रन पार्क की जगह बदलने के पीछे क्या मंशा है, इस काम में किसका पैसा लगा है और पर्दे के पीछे कौन है।

इसकी जानकारी आज से 48 घंटे के अंदर उन्हें दी जाए। संजीव आचार्य ने एसडीओ से कहा कि आज पुरानी कमेटी के लोग तथा भारतीय जनता पार्टी के लोग कोविड के नियमों का उल्लंघन करते हुए किसकी अनुमति से भारी भीड़ लेकर उपायुक्त के कार्यालय में आए। अगर उन्होंने इसके लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली है तो उन पर कोविड-19 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए, अन्यथा भारतीय जनता मोर्चा इससे भी तीन, चार और 10 गुना भीड़ जुटाकर पूरी विधि व्यवस्था को ठप कर देगी।

संजीव आचार्य ने कहा के मंदिर के पार्क में घुसने के लिए प्रति व्यक्ति ₹5 लिए जाते हैं। इसे तत्काल बंद कराया जाए। सूर्य मंदिर में हांल की बुकिंग प्रति घंटा ₹1000 के दर से की जाती है, ऐसा करने वालों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में समस्त सबूत उन्होंने प्रशासन को दिए हैं। इस पर कार्यवाही 48 घंटे के अंदर की जाए। यह पूरा मामला आम जनता के बीच कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।

कुछ लोगों का कहना है कि जब लोग 5 साल से कब्जा की गई अवैध जमीन को नहीं छोड़ते तो रघुवर दास और उनके समर्थक 25 साल पुराने सूर्य मंदिर के अपने कब्जे को कैसे छोड़ देंगे। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सरयू राय सरकारी संपत्ति को रघुवर दास के कब्जे में कैसे रहने देंगे। लोगों का यह भी कहना है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरयू राय की बात सुनते होते तो अब तक वे रघुवर दास को जेल भेज देते।

परंतु हेमंत सोरेन भी रघुवर दास के प्रति अंदर ही अंदर सहानुभूति रखते हैं या यह भी कहा जा सकता है कि उनके भी कुछ ऐसे मामले रघुवर दास के पास हों जिससे में भी जेल जा सकते हैं। ब्लैकमेलिंग की इस राजनीति में सरयू राय दोनों तरफ हे फंसे हुए हैं। इस मामले में सच्चाई क्या है, यह उच्च स्तरीय जांच का विषय है।

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